2015112470l

नई दिल्ली | पीछे ढाई सालो में प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ ऐसी योजनाओं को आगे बढाया है जो यूपीए शासन काल के दौरान चलाई गयी थी और जिनका मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने घोर विरोध किया था. चाहे वो GST हो, मनरेगा हो, FDI हो , आधार कार्ड हो या करेंसी बदलने की योजना हो. अब आप सोच रहे होंगे की यूपीए शासन काल में कब करेंसी बदलने की योजना शुरू हुई?

दरअसल जनवरी 2014 में कांग्रेस शासित सरकार ने 2005 से पहले जारी हुए 500 के नोट बंद करने का आदेश दिया था. तत्कालीन सरकार ने लोगो से बैंक में पुराने नोट जमा कर नए नोट लेने का नोटिस जारी किया था. तत्कालीन सरकार के इस फैसले के खिलाफ बीजेपी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इसे गरीब विरोधी करार दिया था. बीजेपी प्रवक्ता मनीष लेखी की तब की एक प्रेस कांफ्रेंस की विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

और पढ़े -   चीन के साथ कभी-भी हो सकती है भारत की झड़प: पूर्व सेनाप्रमुख वीपी मलिक

कुछ लोग इस विडियो को शेयर कर बीजेपी शासित केंद्र सरकार से सवाल पूछ रहे है की अगर तब यह कदम गरीब विरोधी था तो आज यह कदम गरीबो के पक्ष में कैसे हो गया. इस प्रेस वार्ता में मनीष लेखी ने कहा था वित्त मंत्री पी चिदम्बरम का यह कदम, विदेशों में जमा काले धन को संरक्षण देने की एक चाल है. यह कदम पूरी तरह गरीब विरोधी है.

और पढ़े -   देखे तस्वीरें: देश भर के मदरसों में बड़ी शान से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

मीनाक्षी लेखी ने कहा था की देश के करीब 65 फीसदी लोगो के पास बैंक खाता नही है, और न जाने कितने लोग अशिक्षित है, ऐसे लोग नकद में पैसा रखते है. सरकार के इस कदम से इन लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. यह योजना देश की आम औरत और आम आदमी को परेशान करने के लिए लायी गयी है. इस योजना से कालेधन पर कोई लगाम नही लगने वाली है.

और पढ़े -   सानिया ने दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई, भड़के पाकिस्तानी फेंस

Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE