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नई दिल्ली | पीछे ढाई सालो में प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ ऐसी योजनाओं को आगे बढाया है जो यूपीए शासन काल के दौरान चलाई गयी थी और जिनका मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने घोर विरोध किया था. चाहे वो GST हो, मनरेगा हो, FDI हो , आधार कार्ड हो या करेंसी बदलने की योजना हो. अब आप सोच रहे होंगे की यूपीए शासन काल में कब करेंसी बदलने की योजना शुरू हुई?

दरअसल जनवरी 2014 में कांग्रेस शासित सरकार ने 2005 से पहले जारी हुए 500 के नोट बंद करने का आदेश दिया था. तत्कालीन सरकार ने लोगो से बैंक में पुराने नोट जमा कर नए नोट लेने का नोटिस जारी किया था. तत्कालीन सरकार के इस फैसले के खिलाफ बीजेपी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर इसे गरीब विरोधी करार दिया था. बीजेपी प्रवक्ता मनीष लेखी की तब की एक प्रेस कांफ्रेंस की विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.

कुछ लोग इस विडियो को शेयर कर बीजेपी शासित केंद्र सरकार से सवाल पूछ रहे है की अगर तब यह कदम गरीब विरोधी था तो आज यह कदम गरीबो के पक्ष में कैसे हो गया. इस प्रेस वार्ता में मनीष लेखी ने कहा था वित्त मंत्री पी चिदम्बरम का यह कदम, विदेशों में जमा काले धन को संरक्षण देने की एक चाल है. यह कदम पूरी तरह गरीब विरोधी है.

मीनाक्षी लेखी ने कहा था की देश के करीब 65 फीसदी लोगो के पास बैंक खाता नही है, और न जाने कितने लोग अशिक्षित है, ऐसे लोग नकद में पैसा रखते है. सरकार के इस कदम से इन लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. यह योजना देश की आम औरत और आम आदमी को परेशान करने के लिए लायी गयी है. इस योजना से कालेधन पर कोई लगाम नही लगने वाली है.


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