अवंतीपोरा | कश्मीर के अनंतनाग में लश्कर के आतंकियों के हमले में शहीद हुए एसएचओ फिरोज अहमद डार का पार्थिव शरीर शुक्रवार को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया. इससे पहले उनकी अंतिम यात्रा में गाँव के लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा और शहीद को अंतिम विदाई दी गयी. इस दौरान का वहां का मंजर बेहद ही भावुक कर देने वाला था. उस समय वहां के लोगो को फिरोज की एक फेसबुक पोस्ट बरबस ही याद आ रही थी.

इस पोस्ट में फिरोज ने अपनी अंतिम यात्रा के बारे में कल्पना कर कुछ सवाल पूछे थे. फिरोज ने यह पोस्ट करीब चार साल पहले लिखी थी. इस पोस्ट को पढने ने बाद कोई भी शख्स जो फिरोज की अंतिम यात्रा में शरीक हुआ वो अपने आप को भावनाओं के समुन्द्र में गोते लगाने से अपने आप को नही रोक पाया. फिरोज ने यह पोस्ट 18 जनवरी 2013 को लिखी थी.

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इसमें उन्होंने लिखा,’ क्या आपने एक पल के लिए भी रुककर स्वयं से सवाल किया कि मेरी कब्र में मेरे साथ पहली रात को क्या होगा? उस पल के बारे में सोचना जब तुम्हारे शव को नहलाया जा रहा होगा और तुम्हारी कब्र तैयार की जा रही होगी. उस दिन के बारे में सोचो जब लोग तुम्हें तुम्हारी कब्र तक ले जा रहे होंगे और तुम्हारा परिवार रो रहा होगा…उस पल के बारे में सोचो जब तुम्हें तुम्हारी कब्र में डाला जा रहा होगा’.

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32 वर्षीय फिरोज का पार्थिव शरीर शुक्रवार को पुलवामा जिले स्थित उनके पैतृक गांव डोगरीपुरा लाया गया. उसी दौरान फिरोज के घर के बाहर श्रदांजली देने के लिए लोगो का हुजूम जुड़ना शुरू हो गया. अपने बेटे को तिरंगे झंडे में लिपटा देखकर फिरोज के माँ बाप खुद को रोक नही पाए. उधर फिरोज की पत्नी  मुबीना अख्तर का रो रोकर बुरा हाल था. फिरोज की दोनों बेटिया 6 साल की अदाह और 2 साल की सिमरन भी समझ नही पा रही थी आखिर उनके पिता को इस तरह क्यों लाया जा रहा है. यह पूरा मंजर बेहद भावुक कर देने वाला था.

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