जवाहरलाल नेहरू (जेएनयू) कैंपस में मनुस्मृति की प्रति जलाने से संत खफा हैं। वह इस कृत्य को भारतीय संस्कृति पर हमला बताते हुए दोषी छात्रों को दंडित करने की मांग कर रहे हैं। संतों का कहना है कि मनुस्मृति में ऐसा कुछ नहीं है जिससेउसकी प्रति जलाई जाए। कुछ शक्तियां सनातन धर्म के खिलाफ काम कर रही हैं, यह उसी का हिस्सा है। अगर ऐसे लोगों को जल्द न रोका गया तो स्थिति और खराब हो जाएगी। यह न सनातन धर्म के लिए ठीक है न ही भारत के लिए।

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काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि कलियुग में मनु स्मृति नहीं बल्कि परासर स्मृति मान्य है। मनु ने सतयुग में मानव और समाज के लिए विधान निर्मित किया था। परंतु उसमें देश को तोड़ने एवं जाति विशेष के खिलाफ कोई गलत बात नहीं कही गई। कुछ लेखकों ने अर्थ का अनर्थ करते हुए मनु स्मृति में बदलाव किया है। साथ ही कहा कि मनु स्मृति जलाकर छात्रों ने अक्षम्य अपराध किया है, यह लोगों की भावनाओं को भड़काने वाला है, जिसके खिलाफ सरकार तत्काल कड़ी कार्रवाई करे।

टीकरमाफी आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्माचारी ने कहा कि धर्मग्रंथ को सामूहिक रूप से जलाना अनुचित है। मनु स्मृति जलाने वालों को उसका ज्ञान ही नहीं है। महामंडलेश्वर रामतीर्थ दास कहते हैं कि सनातन धर्म को नीचा दिखाकर देश तोड़ने की साजिश चल रही है, जिसमें कई नामी नेता भी शामिल हैं। वह विदेशी शक्तियों के इशारे पर ¨हदू देवी-देवताओं व धर्मग्रंथों का अपमान कर रहे हैं। दंडी संन्यासी समिति के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि मनु स्मृति को जलाकर ¨हदुओं की भावनाओं को भड़काया जा रहा है। सरकार उपद्रवी छात्रों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई करे, ऐसे कृत्य को किसी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। (जागरण)


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