modi manmohan

नई दिल्ली | कल यानी 8 नवम्बर को नोट बंदी के एक साल पुरे होने जा रहे है. इसलिए सत्ता पक्ष के अलावा विपक्ष भी पुरे जोर शोर के साथ नोट बंदी के मुद्दे को उठा रहा है. जहाँ सत्ता पक्ष नोट बंदी के फायदे गिना रहा है वही विपक्ष इसे बड़ी विफलता करार दे रहा है. इसके लिए विपक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मोर्चे पर लगाया है. यही नही कांग्रेस, मनमोहन सिंह को गुजरात चुनाव में प्रचार के लिए भी उतार रही है.

मंगलवार को शुरू होने वाले गुजरात दौरे से पहले मनमोहन सिंह ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में नोट बंदी को लेकर एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने इसे विनाशकारी आर्थिक नीति बताते हुए कहा की मोदी सरकार के इस फैसले से समाज में असमानता का खतरा बढ़ गया है. इसके चलते बड़े पैमाने पर आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत नुक्सान हुआ है. मनमोहन ने मोदी सरकार को चेताते हुए कहा की GDP का गिरना आर्थिक नुक्सान का महज एक संकेत है.

 ब्लूमबर्गक्विंट डॉटकॉम से बात करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा की नोट बंदी का असर गरीब तबके और छोटे व्यापारियों पर ज्यादा पड़ा है. जो कही ज्यादा नुकसानदायक है. इसकी वजह से बड़ी संख्या में नौकरिया ख़त्म हो गयी है. मेरा मानना है की भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में यह कदम एक बड़ी सामाजिक विपत्ति साबित होगी. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी इस ‘भारी गलती’ को स्वीकार करे और अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए आम सहमती की दिशा में काम करे.

नोट बंदी से नौकरियों पर पड़े प्रभाव की बात करते हुए मनमोहन ने कहा की हमारे देश की तीन चौथाई गैर-कृषि रोजगार छोटे और मझोले उद्यमों के क्षेत्र में हैं, नोट बंदी का सबसे ज्यादा असर इसी क्षेत्र पर पड़ा है इसलिए नौकरिया चली गयी और नयी पैदा नही हो रही है. इसलिए इसके दीर्घकालिक परिणाम क्या होंगे यह सोचकर मैं ज्यादा चिंतित हूँ. उल्लेखनीय है की मनमोहन सिंह गुजरात दौरे में व्यापारियों से जीएसटी और नोट बंदी को लेकर बात भी करेंगे.


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