नई दिल्ली | म्यांमार में हिंसा का शिकार हो रहे रोहिंग्या मुस्लिम, आस पड़ोस के देशो में शरण लेने के लिए मजबूर है. अपने ही देश में इन लोगो को बेरहमी से मारा जा रहा है, इनके घर जलाए जा रहे है, यहाँ तक की बच्चो को भी गोली मारी जा रही है. एक आंकड़े के अनुसार करीब ढाई लाख रोहिंग्या मुस्लिम , म्यांमार से जा चुके है. इनमे से कुछ शरणार्थी भारत भी पहुंचे है. लेकिन भारत सरकार इन शर्णार्थियो को भारत में शरण देने के पक्ष में नही है.

इसलिए रोहिंग्या मुस्लिमो को वापिस म्यांमार भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. फ़िलहाल मानवता के लिहाज से मोदी सरकार का यह कदम किसी भी लिहाज से जायज नही ठहराया जा सकता. इसलिए कई विपक्षी दल भी मोदी सरकार के इस फैसले की आलोचना कर रहे है. खुद संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग ने भारत के इस रुख की आलोचना की है. उन्होंने इसे गैर क़ानूनी करार दिया है.

उधर कांग्रेस ने भी मोदी सरकार के इस फैसले को गलत करार दिया है. उनका कहना है की यह भारत की परम्परा और संस्कृति रही है की दबे कुचले और पीड़ित को हमेशा सहारा दिया जाये. लेकिन मोदी सरकार भारतीय संस्कृति के मूल्यों को नीचे गिरा रही है. कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी को ही निशाने पर ले लिया. उन्होंने रोहिंग्या शर्णार्थियो की तुलना गुजरात दंगो के पीडितो से ही कर डाली.

दिल्ली में शुक्रवार को हुए एक कांफ्रेस में बोलते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कहा की जो इन्सान ( पीएम मोदी ) भारतीय मुस्लिमो को कुत्ता समझता हो , उससे रोहिंग्या मुस्लिमो के लिए क्या उम्मीद की जा सकती है. मेरा मानना है की मोदी सरकार रोहिंग्या मुस्लिमो को केवल आस्था के आधार पर निशाना बना रही है. इस कांफ्रेंस को मुस्लिम पॉलिटिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया (एमपीसीआई) ने आयोजित किया था. इसमें वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख डॉ जफरुल-इस्लाम खान भी शामिल हुए.


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