मेनका गांधी ने पत्रकारों के खिलाफ इसलिए शिकायत की, क्‍योंकि इन्‍होंने 19 अक्‍टूबर 2015 को की गई एक रिपोर्ट में बदलाव करने से इनकार दिया था।

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केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सरकार से दो पत्रकारों को ब्‍लैकलिस्‍ट करने की गुजारिश की थी, जिसे अस्‍वीकार कर दिया गया है। जिन पत्रकारों को ब्‍लैकलिस्‍ट करने के लिए मेनका गांधी ने कहा था, उनके नाम हैं- आदित्‍य कालरा और एंड्रयू मैकस्किल। ये दोनों समाचार एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करते हैं। जानकारी के मुताबिक, मेनका गांधी ने इन दोनों के खिलाफ इसलिए शिकायत की, क्‍योंकि इन्‍होंने 19 अक्‍टूबर 2015 को की गई एक रिपोर्ट में बदलाव करने से इनकार दिया था।

विवाद ‘India’s budget cuts hurt fight against malnutrition: Maneka Gandhi’ (बजट में कटौती के कारण पड़ेगा कुपोषण से लड़ाई पर बुरा असर: मेनका गांधी) हेडलाइन से लिखी गई खबर को लेकर था। रॉयटर्स ने इसे प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की सार्वजनिक रूप से विरले की जाने वाली आलोचना बताते हुए मेनका गांधी के हवाले से लिखा था कि उनके मंत्रालय का बजट करीब 50 फीसदी घटाकर 1.6 अरब डॉलर कर दिया गया। इस वजह से कुपोषण के खिलाफ लड़ाई की उनकी योजना प्रभावित होगी, क्‍योंकि बजट में दिया गया पैसा 27 लाख स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को जनवरी तक तनख्‍वाह देने में ही खर्च हो जाएगा।

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खबर जारी होने पर मेनका गांधी के मंत्रालय ने इसका कड़ा खंडन किया और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की आलोचना बताए जाने को गलत और शरारतपूर्ण करार दिया। उसी दिन मंत्रालय की ओर से स्‍पष्‍टीकरण जारी किया गया। इसमें यह भी कहा गया कि मंत्रालय रॉयटर्स के खिलाफ उचित कदम उठाएगा।

20 अक्‍टूबर 2015 को रॉयटर्स ने मेनका गांधी के मंत्रालय का खंडन भी जारी किया और यह भी कहा कि वह अपनी पहली खबर की सत्‍यता को लेकर कायम है। उसी दिन मेनका गांधी के निजी सचिव मनोज के अरोड़ा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव सुनील अरोड़ा को एक चिट्ठी लिखी।

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इसमें कहा गया, ”मुझे आपसे कालरा और मैकस्किल की पीआईबी (प्रेस इन्‍फोरमेशन ब्‍यूरो) मान्‍यता रद्द करने का आग्रह करने के लिए निर्देश दिया गया है। चिट्ठी में मेनका के सचिव ने दावा किया कि उन्‍होंने पत्रकार और रॉयटर्स के संपादक से इस मुद्दे पर बात की। उन्‍होंने यह माना कि मंत्री ने ऐसी बात नहीं कही है, बल्कि खबर जो लिखा गया वह उनकी ओर से की गई व्‍याख्‍या है। इसके बाद बार-बार खबर में संशोधन और वापस लेने की गुजारिश की गई, लेकिन उन्‍होंने इस मांग को खारिज कर दिया।

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इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह मामला 7 मार्च को पीआईबी को सौंप दिया, जिसने पत्रकारों को ब्‍लैकलिस्‍ट में डालने से इनकार कर दिया। पीआईबी ने मेनका गांधी के मंत्रालय को सुझाव दिया कि वह इस मामले को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष उठाए। इंडियन एक्‍सप्रेस ने मेनका गांधी और उनके ऑफिस से कई बार फोन कॉल्‍स और मैसेज के जरिए प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया, लेकिन उनकी ओर कोई जवाब नहीं मिला। (jansatta.com)


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