कोलकाता । हमारे देश में आए दिन कोई न कोई चुनाव होता रहता है। अभी दो राज्यों के अंदर विधानसभा चुनाव होने है तो एक राज्य में निकाय चुनाव। यही वजह है की सरकारों के दिमाग़ में भी जनहित से ज़्यादा चुनाव घूमते रहते है। चूँकि हमारे देश में वोट धर्म और जाति के आधार पर ज़्यादा डाली जाति है इसलिए इसी आधार पर सरकारें अपनी नितिया निर्धारित करती है। क्या फ़ैसला लेने से किस समुदाय के लोग ज़्यादा ख़ुश होंगे, इसके समीकरण बिठाए जाते है।

अब चीज़ें इतनी स्पष्ट हो चुकी है की यह बताने की कोई ज़रूरत नही रही की गाय की बात करने वाला हिंदुओ की वोट साधने की कोशिश कर रहा है। चूँकि हमने ख़ुद को बाँटने के साथ साथ, रंग, जानवर और इमारतों को भी हिंदू मुस्लिम में बाँट दिया है। इसी बात का फ़ायदा सियासी लोग उठा रहे है। इसका एक उदाहरण पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। जहाँ पंचायत चुनावों को देखते हुए राज्य सरकार ने बेहद हैरान कर देने वाला फ़ैसला लिया।

दरअसल राज्य सरकार ने गाँव के सभी परिवारो को एक एक गाय देने का फ़ैसला किया है। हालाँकि सरकार का कहना है की यह फ़ैसला राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए लिया गया है। लेकिन जानकारो का मानना है की आगामी पंचायत चुनावों को देखते हुए यह फ़ैसला लिया गया। इस बारे में बताते हुए राज्य के पशु संसाधन विकास मंत्री स्वापन देबनाथ ने कहा सरकार की इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों को आत्म निर्भर बनने में मदद मिलेगी।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण परिवारों में गाय वितरण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। जबकि अगले साल के शुरुआती महीनों में इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। इस योजना की शुरुआत वीरभूम जिले से होगी। फ़िलहाल सरकार का एक हज़ार गाय वितरण करने का टार्गट है। जब स्वापन से पूछा गया कि कही यह फ़ैसला पंचायत चुनाव में हिंदू कार्ड खेलने के लिए तो नही लिया गया तो उन्होंने इससे इंकार करते हुए कहा की इस फ़ैसले से राज्य दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा।


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