कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक फैसला विवादों के घेरे में आ गया है. ममता ने एक मुस्लिम मंत्री को ताकेश्वर मंदिर बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया है जिसके बाद पुरे देश में सियासी बवाल खड़ा हो गया है. कुछ हिंदूवादी संगठन , आरएसएस और बीजेपी ने ममता सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. उन्होंने ममता पर एक विशेष वर्ग के तुष्टिकरण का आरोप लगाया.

दरअसल गुरुवार को ममता बनर्जी ने अपनी ही सरकार में मंत्री फरहाद हाकिम को. हुगली जिले में स्थित प्रसिद्ध तारकेश्वर मंदिर बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया. इसके अलावा ममता सरकार ने इस बोर्ड को 5 करोड़ रूपए आवंटित करने का भी आदेश दिया. बताते चले की हुगली में तारकेश्वर का यह मंदिर करीब 250 साल पुराना है. जिस जगह पर यह मंदिर स्थित है उसके चारो और के इलाके को तारकेश्वर के नाम से ही जाना जाता है.

वर्षो से यहाँ का मंदिर बोर्ड बेहतर काम करता आया है. इस मंदिर बोर्ड के अधीन केवल मंदिर का रख रखाव ही नही आता बल्कि यह बोर्ड मेडिकल कॉलेज और विश्विधालय का संचालन भी करता है. ममता के इस फैसले पर अब विवाद भी शुरू हो गया है. हिन्दू महासभा ने फरहाद की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा की जब वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष केवल मुस्लिम ही बन सकता है तो मंदिर बोर्ड का अध्यक्ष एक मुस्लिम क्यों बनाया गया.

हिन्दू महासभा ने ममता को चुनौती दी की अगर उनमे हिम्मत है तो वो वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष एक हिन्दू को बनाकर दिखाए. उधर संघ प्रचारक राकेश सिन्हा ने भी ममता सरकार के फैसले की आलोचना की. उन्होंने सवाल किया की क्या मंदिर बोर्ड के अध्यक्ष मंदिर के अन्दर जायेंगे? अगर ऐसा नही है तो वो मंदिर का रखरखाव कैसे करेंगे? हालाँकि पुरे मामले पर फरहाद ने सफाई देते हुए कहा की बंगाल में मंदिर मस्जिद के उपर राजनीती नही होती. उधर सुब्रमन्यम स्वामी ने ममता सरकार के फैसले को कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है.


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