नई दिल्ली | अभी हाल ही में सेना जीप के आगे बंधे एक व्यक्ति की तस्वीर काफी सुर्खियों में आई थी. कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए बताया था की इस शख्स को सेना ने अपनी जीप के आगे बांधा हुआ है. इसके बाद सेना की इस कार्यवाही की काफी आलोचना हुई थी. बाद में सेना के तरफ से बयान आया था की सेना के जवानों को पत्थरबाजो से बचाने के लिए उस शख्स को जीप के आगे बाँधा गया था.

सेना की और से जारी बयान में यह भी कहा गया की जीप से बंधा शख्स खुद पत्थरबाज था. हालांकि उस शख्स ने इस बात से इनकार किया था. अब सेना ने मेजर नितिन गोगई को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) कॉमन्डेशन से नवाजा है. नितिन गोगई ने ही इस तरह की कार्यवाही करने के आदेश दिए थे. अपने फैसले का बचाव करते हुए सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने कहा की इस तरह के सम्मान से घाटी में जवानो के मनोबल को और बल मिलेगा.

इकनोमिक टाइम्स से बात करते हुए जनरल रावत ने कहा की गोगई ने उचित समय पर उचित निर्णय लिया. सेना की जिम्मेदारी घाटी में हिंसा में कमी लाना और शांति बहाल करना है. इसलिए मैं मानता हूँ की गोगई ने परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए सही फैसला लिया. किसी को तो फैसला लेना ही था. इसलिए गोगई को सम्मान देने का फैसला किया गया. इससे घाटी में तैनात जवानों का मनोबल बढेगा.

गोगई के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा की जहाँ तक मुझे जानकारी है , उसने कोई अपराध नही किया है. इसलिए उसके खिलाफ किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्यवाही नही होगी. जांच के बाद अगर वो दोषी पाए भी गए तो उनके खिलाफ बड़ी कार्यवाही नही होगी. पत्थरबाजो पर कार्यवाही के बारे में जनरल रावत ने कहा की हम उनके साथ वैस ही सलूक करेंगे जैसा राष्ट्रद्रोहियों के खिलाफ होता है. इसलिए उनके माता पिता को उन्हें हिंसा से दूर होनी की बात समझानी चाहिए.


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