जमीअत उलेमा ए हिन्द के नेतृत्व में मुस्लिम समुदाय के 25 नेताओं ने पीएम मोदी से उनके सरकारी आवास पर जाकर मुलाकात की. बैठक के बाद जमीअत उलेमा ए हिन्द के नेता महमूद मदनी ने कहा कि पीएम् के साथ उनकी बातचीत सकारत्मक रही है और बातचीत के बाद कई मुद्दों पर उम्मीद बनी है.

उन्होंने बताया कि  पीएम का सभी मुद्दों पर रुख तसल्ली देने वाला रहा. पीएम ने उनसे कहा कि डेमोक्रेसी की सबसे बड़ी ताकत आपसी प्यार और सद्भभावना है. किसी भी सरकार को नागरिकों से भेदभाव करने का कोई हक नहीं है. पीएम ने कहा कि भारत की खूबसूरती ही ‘अनेकता में एकता’ है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को दुनिया में बढ़ती कट्टरता से बचाना जरूरी है.

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महमूद मदनी ने कहा कि कई राज्यों में गौ रक्षा के नाम पर निजी संगठन कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं. प्रधानमंत्री ने इस तरह के संगठनों की निंदा करके सही संदेश दिया था, पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासन स्तर पर बहुत कुछ किया जाना जरूरी है. कोई व्यक्ति या संगठन कानून से ऊपर नहीं है. जमीअत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना मुहम्मद उस्मान मंसूरी की अगुआई में मिले प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री को इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा.

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उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने हमारी बात को पूरी तरह से सुना और हमारी चिंताओं से सहमत हुए. मदनी ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ हमारी मुलाकात में मुख्य रूप से पारस्परिक बातचीत के द्वार खोलने के लिए और करीब से समझने की वजह से आगे के अवसर पैदा होंगे और हम सभी हमारे देश के विकास में हमारी भूमिका निभाने में सक्षम होंगे.

प्रतिनिधिमंडल में मुस्लिम मजलिस-ए मुशावरात, जमात-ए इस्लामी हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड या दारुल उलूम देवबंद जैसी संस्थाओं के प्रमुख नेता शामिल नहीं थे

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