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मुंबई: जब देशभर में देशद्रोही बनाम देशभक्त की पुरवाई अपने जोरो पर है ऐसे में सत्ताधारियों से देशभक्त में पहचाने में हुई इतनी बड़ी गलती बेहद शर्मनाक है, शहीद दिवस पर जहां देश क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद कर रहा था तब मुम्बई में उनकी पहचान बदल दी गई। राज्य सरकार की तरफ़ से इन तीनों शहीदों को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सरकार के प्रशासनिक मुख्यालय ‘मंत्रालय’ के सामने इस लिए बाकायदा पंडाल लगा कर तीनों की तस्वीरें लगा दी गई थी।

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इन तस्वीरों को अगर गौर से देखा जाए तो कोई भी झटके में समझ जाएगा की कुछ गड़बड़ है। वो गड़बड़ यह थी कि महाराष्ट्र सरकार के सरकारी मुलाजिमों ने पगड़ीवाले भगत सिंह की तस्वीर रख कर उसके नीचे ‘सुखदेव’ लिख दिया। ऐसे में कार्यक्रम स्थल पर शहीद-ए-आजम कहलाते भगत सिंह की 2 तस्वीरें थी। एक फैल्ट हैट पहनी और दूसरी पंजाबी पगड़ी पहनी हुई। जिसमें से पंजाबी पगड़ी पहनी तस्वीर को महाराष्ट्र सरकार सुखदेव बता रही थी।

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विधायक बच्चू कडू ने इस मुद्दे को राज्य विधानसभा में उठाया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि शहीदों की पहचान के साथ खिलवाड़ करनेवाले सरकारी कर्मचारियों को निलंबित किया जाए। गौरतलब है कि राज्य के मुख्यमंत्री खुद दिन की शुरुआत में शहीदों को नमन कर चुके थे। लेकिन तब भी किसी को यह चूक नजर नहीं आयी।

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भारतीय स्वाधीनता संग्राम के भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव वो सेनानी थे जिन्होंने अंग्रेजों की हुक़ूमत को उखाड़ फेंकने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए। इसी तरह क्रन्तिकारी सुखदेव ने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए की गई अंग्रेज अधिकारी सैंडर्स की हत्या में भगत सिंह और राजगुरु का सहयोग दिया। उनके क्रांतिकारी आंदोलन के चलते 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने लाहौर जेल में भगत सिंह और राजगुरु के साथ सुखदेव को भी फांसी दे दी। इसी की याद में 23 मार्च को शहिद दिवस कहा जाता है।

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