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इस्लामिक शरीअत के नाम पर फैलाई जा रही भ्रांतियाँ को दूर करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ फ़ॉर लायर्स का एक ट्रेनिंग कोर्स शुरू किया हैं. ये ट्रेनिंग कोर्स रविवार को शुरू किया गया हैं. जिसमें इस्लामिक शरी’अत के हिसाब से वकीलों को ट्रेनिंग दी जाएगी और शरी’अत के बारे में भ्रांतियाँ भी दूर की जायेंगी.

कोर्स को लांच करते हुए पूर्व चीफ़ जस्टिस ए.एच. अहमदी ने कहा कि हर समाज कभी ना कभी मुश्किल का सामना करता है और ऐसा होने पर समाज को अपनी कमियाँ समझ कर उनमें सुधार करने की कोशिश करनी चाहिए ना कि बहुत ज़्यादा भावनात्मकता में डूब जाना चाहिए.

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अहमदी ने भारत में सिविल कोड को बनाये जाने को लेकर आगे कहा कि भारत जैसे कई संस्कृतियों के देश में कॉमन सिविल कोड लाना एक ग़लत क़दम होगा. जमात-ए-उलेमा हिन्द के जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इसमें शादी, तलाक़, गवाही जैसे मुद्दों पर क़ानूनी सीख दी जायेगी.

इस मौक़े पर मौलाना अबुल क़ासिम नोमानी, मौलाना सैयद मोहम्मद शाहिद, ज़फ़रयाब जिलानी, कमाल फ़ारूक़ी, शकील अहमद सैयद जैसे ओग मौजूद थे.

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