नई दिल्ली | हमारे देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध लगातार बढ़ते जा रहे है. कई कानून बनाने के बाद भी ऐसे अपराधो पर लगाम नही लगी है. अभी भी देश के हालात ऐसे है की काफी पीड़ित महिलाए अभी भी पुलिस या अदालत जाने से कतराती है. यह केवल इसलिए है क्योकि उनको लगता है की पुलिस या अदालत में जाने से उनकी और बदनामी होगी. यह भी हमारी व्यवस्था की एक नाकामी है.

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असल में जब भी कोई महिला यौन शोषण या बलात्कार का शिकार होती है तो अदालत में बचाव पक्ष के वकील पीडिता से बेहद ही निजी सवाल करते है. ऐसी स्थिति में महिला को ऐसा लगता है जैसे यहाँ भी उसका बलात्कार किया जा रहा हो. कुछ तो ऐसे सवाल होते है जिसको सुनकर न्याय अधिकारी को भी शर्म आ जाती है. लेकिन फिर भी वह बचाव पक्ष के वकील को ऐसे सवाल करने से नही रोक पाते.

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दरअसल एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने 16 रेप पीडितो से बात कर यह जानने की कोशिश की , कि अदालत में उनसे किस तरह के सवाल पूछे जाते है. इन सभी पीड़ितों के केस दिल्ली की फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहे है. बातचीत के दौरान ऐसी बाते सामने आई जिसको सुनकर कोई भी शर्मिंदा हो जाए. एक पीडिता से वकील यहाँ तक पूछ लेता है की पेनेट्रेशन के समय क्या आप रोई थी और आपके आँखों में आंसू आये थे?

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एक अन्य पीडिता ने बताया की उससे वकील ने पुछा की आपने शोर मचाने की कोशिश की थी? दूरी पीडिता बताती है की वकील ने पुछा की क्या रेप के दौरान तुमने शोर मचाने और आरोपी को नाख़ून से काटने की कोशिश की थी? इसके अलावा भी बहुत सारे ऐसे सवाल उनसे किये जाते है जो साझा नही किये जा सकते.


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