लातेहार

लातेहार ज़िले का गांव है आराहरा. इसी गांव के मोहम्मद आज़ाद ख़ान के बेटे इम्तियाज़ का कत्ल हुआ. उसकी उम्र सिर्फ 12 साल थी.

बीते शुक्रवार को पड़ोसी गांव झाबर में उसकी लाश पेड़ से लटकी मिली. उसके साथ नवादा गांव के मज़लूम अंसारी की लाश भी फंदे से लटकी मिली.

मज़लूम अंसारी के परिजनों का आरोप है कि गोरक्षा समिति के सदस्यों ने इन लोगों को मारा है जो पशुओं की ख़रीद फ़रोख्त के खिलाफ हैं.

मज़लूम अंसारी और इम्तियाज़ का शव पेड़ से लटकता देख लोग भड़क गए थे और भीड़ को तितरबितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी थी.

इम्तियाज़ व्यापारियों के लिए जानवर हांकने का काम करता था. एक जगह से दूसरी जगह तक जानवरों की एक खेप हांकने के उसे करीब 250 रुपये मिलते थे.

इसी मेहनताने से उसके घर में चूल्हा जलता था. उसकी दो जवान बहनों का निकाह भी इसी कमाई के भरोसे था.

लातेहार

इम्तियाज़ की मां नजमा बीबी ने बीबीसी को बताया, “मेरे शौहर का दो साल पहले पैर टूट गया. वे कमजोर हैं. चलने-फिरने में दिक्कत है. काम भी नहीं कर पाते. एक बड़ा बेटा है. उसे समझ-बूझ नहीं है, निकम्मा है. इम्तियाज़ की हत्या के बाद हम अनाथ हो गए हैं. वह मासूम था. लेकिन, कमाता था. सपने देखता था. मेरे घर का तो वही गार्जियन था.”

लातेहार

आराहरा तक जाने के लिए एक कच्ची सड़क है.

नवादा से आराहरा कार से नहीं जा सकते. लोग दोपहिया वाहन से जाने की सलाह देते हैं.

रास्ते में जंगल है. कभी इसमें नक्सलियों का बसेरा था. अब बदमाशों और जानवरों का डेरा है. हम भी इसी रास्ते उनके घर पहुंचे.

एक दिन पहले बृंदा करात भी ऐसे ही उनके घर गयी थीं.

आज़ाद खान और नजमा बीबी का घर खपरैल का है. बाहर चौकी पर चटाई बिछा दी गयी है. क्योंकि, कई लोग हाल जानने आ रहे हैं.

लातेहार

नजमा बीबी ने बीबीसी को बताया, “गांव के डीलर ने हमें 20 किलो चावल, 2 किलो चीनी और 5 लीटर केरोसन दिया है. बाकी के लोगों ने कोई सुध नहीं ली.”

अंजुमन इस्लामिया से जुड़े मौहम्मद तौकीर अहमद ने बीबीसी से कहा, “इम्तियाज़ की हत्या बहुत बड़ा ज़ुल्म है. वह बच्चा न तो व्यापारी था और ना दोषी. वह तो मजदूरी के लालच में जानवर हांकने का काम करता था. उसके घरवालों को इंसाफ मिलना चाहिए.”

मौलाना मोहम्मद जियाउल्लाह मोहाजिरी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “प्रशासन को इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करानी चाहिए. हत्यारों को फांसी की सज़ा मिले. बच्चे को मारा. यह इंसानियत नहीं है. इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है. हमें अपने अंदर इंसानियत पैदा करनी चाहिए.” (बीबीसी)


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें