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मुंबई – कोहराम न्यूज़ – देशभर में ट्रिपल तलाक़ और यूनिफार्म सिविल कोड को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जुमे की नमाज़ के बाद देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है. इस कड़ी में आज भिवंडी में रज़ा एकेडेमी ने शरियत बचाओ कांफ्रेंस आयोजित की.

रज़ा एकेडेमी के बैनर तले आयोजित की गयी इस कांफ्रेंस में बोलते हुए दिल्ली से आये उलेमाओं ने कहा की एक वाहिद इस्लाम ही ऐसा मज़हब है जिसने सबसे पहले औरतों के हुकूक दिए वर्ना जिस समय इस्लाम अस्तित्व में नही आया था उस समय बच्चियों को जन्म लेते ही जिंदा दफ़न कर दिया जाता था. औरतों को प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी सुनिश्चित कराने वाला इस्लाम ही है.

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कोहराम न्यूज़ को प्राप्त खबर के अनुसार एकेडेमी के सईद नूरी तथा अल्लामा यासीन अख्तर मिस्बाही ने कहा की यह आन्दोलन दरगाह आला हजरत बरेली शरीफ के आह्वान पर देश भर में चल रहे शरीअत बचाओ आन्दोलन के तहत आयोजित किया गया है. जिसका मुख्य मकसद शरीयत को बचाना है.

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वहीँ मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए कहा की अगर औरतों को हक दिलाने की बात कर रहे है तो सबसे पहले गुजरात की विधवाओं को उनका हक दिलाए उसके बाद अन्य महिलाओं की बात करें.

लाखो लोगो के हुजूम से खचा खच भरे मैदान में उलेमाओं ने कहा की अगर मोदी सरकार में हिम्मत है तो यूनिफार्म सिविल कोड का मसौदा पेश करे क्यों की अलग अलग मज़हब के मानने वालो को किसी दूसरी जीवन शैली अपनाने पर मजबूर नही किया जा सकता.

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