सहारनपुर | 20 अप्रैल को सहारनपुर में हुए दंगो के बाद बीजेपी नेताओं ने इसके लिए वहां के एसएसपी लव कुमार को जिम्मेदार ठहराया था. बीजेपी सांसद राघव् लखनपाल शर्मा का कहना था की चूँकि पुलिस ने हमें अम्बेडकर जयंती पर जुलुस निकालने की अनुमति नही दी थी इसलिए यह दंगा हुआ. हालाँकि यह सामने आया है की पुलिस ने उस दिन जुलुस निकालने की इजाजत दी थी.

यही नही दलित समुदाय की तरफ से बीजेपी सांसद को आमंत्रण भी नही दिया गया था. कुछ तथ्य सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है की बीजेपी सांसद ने जबरदस्ती करके जुलुस को मुस्लिम बाहुल्य इलाके से गुजारा जबकि खुद दलित समुदाय जुलुस को इस इलाके से नही गुजरना चाहता था. यही नही पुलिस ने भी जुलुस को इस इलाके से निकालने की अनुमति नही दी थी. लेकिन राघव लखनपाल के उकसाने पर यह जुलुसू वहां से गुजारा गया.

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पुलिस रिकार्ड्स के अनुसार 12 अप्रैल को देवेन्द्र अग्रवाल नामक व्यक्ति ने जुलुस के लिए अनुमति मांगी थी. देवेन्द्र विश्व हिन्दू परिषद् से जुड़ा हुआ है. लेकिन तब पुलिस ने अनुमति नही दी.  एनडीटीवी की खबर के अनुसार दुधली गांव के नरेश गौतम ने बताया की जब बीजेपी को जुलुस की अनुमति नही मिली तो हमने 14 अप्रैल को ही गाँव में ही बैठक कर ली थी. इसलिए हमें जुलुस निकालने की आवश्यकता भी नही थी.

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गौतम ने आगे बताया की उन्होंने शोभायात्रा से कुछ दिन पहले एक बीजेपी नेता गाँव में आया. उसने हमसे कहा की वो यात्रा की पूरी अनुमति दिलवाएंगे. लेकिन शर्त यह है की इसमें लखनपाल आमंत्रित होंगे. बाद में पुलिस ने 20 अप्रैल के लिए जुलुस निकालने की अनुमति दे दी. लेकिन जुलुस को मुस्लिम बहुल इलाके से निकालने की अनुमति नही दी गयी. इसलिए यह स्पष्ट है की जानबूझकर कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक स्थिति पैदा करने के लिए जुलुस को वहां से गुजारा गया.

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