पिछले सप्ताह से लगातार बंगाल में तनाव की स्थिति बनी हुई है मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक में इस तनाव की स्थिति को दंगा कहकर प्रायोजित किया जा रहा है लेकिन क्या यह दंगा था या उग्र प्रदर्शन. जानिये आँखों देखि.

” आज हम पश्चीम बंगाल के 24 परगना (उत्तर) में कई उस ज़गह पर गये ज़हाँ अभी तक कोई मिडीया नही पहुँच पाया है l सच्चाई जानने की पुरी कोशिश किया , बिना खाये पिये पुरा दिन अपनी कार से घुमता रहा , कई समाज सेवी और ज़िम्मादार नागरिकों से भेंट किया , हिन्दू और मुसलीम मोहल्ले में भी लोकल लोगों से मिला l सफर काफी कठीन था , कोलकाता से बशीरहाट के बिच 6 ज़गहों पर नाके बन्दी थी , मिडीया के एलावा बाहरी लोगों (समाजसेवी एवं राजनेता) को जाने पर प्रतीबंध है l ज़गह ज़गह नाकेबंदी , मिडीया की बुखलाती खबरें , राज़निती की गर्मी , राजनेताओं के उथल पुथल , देश का ध्यान देख कर ऐसा लग रहा था जैसे बंगाल में कोई भुचाल आ गया हो , मेरे साथी भी काफी परेशान और घबराये हुए थे फिर भी हम बढ़ते हुए सच्चाई की तलाश कर रहे थे , पेश है एक रिपोर्ट :

सौभीक सरकार के पड़ोसी सांची मंडल ,नूर अली एवं सौभीक सरकार के घर से 20 फिट की दुरी पर मस्जीद के ईमाम से मिला l पड़ोसीयों एवं ईमाम साहेब के अनुसार सौभीक सरकार एक अच्छा और शरीफ लड़का है , वह इस तरह का गंदा और आपत्ती जनक काम नही कर सकता है l सांची मंडल के अनुसार सौभीक सरकार का मित्र जो उसका फेसबुक पासवर्ड जानता था उसी ने सौभीक सरकार के फेसबुक वाल पर आपत्ती जनक फोटो डाल कर इस घटना को अंजाम दिया है और सौभीक सरकार के साथ षढ़यंत्र किया है l

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इस घटना के बाद मुफती अबदुल कय्युम और मुफती अबदुल मतीन ने बड़ी संख्या में भाड़े पर बाहर से नौज़वानों को लाकर भड़काव भाषन दिया , सौभीक सरकार के घर पर हमला किया lअपने भाषन में सौभीक सरकार को 12 घंटें में गिरफतार करने के लिये ज़िला प्रशासन पर दबाव बनाया l ज़िला प्रशासन ने 4 घंटें के अंदर सौभीक सरकार को गिरफतार कर लिया लेकीन दुसरे दिन ही मुफती अबदुल कय्युम और मुफती अबदुल मतीन ने बशीरहाट और आस पास के 35 ज़गहों पर बाहरी लोगों को भाड़े पर लाकर सड़क जाम कर दिया और साथ ही पुलिस पर दबाव बनाया के सौभीक सरकार को भीड़ के हवाले किया ज़ाये ताके भिड़तंत्र द्वारा उसे सरेआम फांसी दी ज़ायें l पुलिस द्वारा सौभीक सरकार को भिड़तंत्र को हवाले किये ज़ाने की बात को अस्वीकार किये ज़ाने पर ज़िला प्रशासन के साथ झड़प के साथ बादुरिया थाने पर आगज़नी और लगभग 20 दुकानों पर लूट पाट और आगज़नी किया गया l

इन दोनों मुफतियों एवं इंके द्वारा लाये गये बाहरी लोगों का नारा था “बंगाल का मुसलमान जाग चुका है”l

इस पुरी गुंडागर्दी वाली घटना के दौरान लोकल (स्थानीय) एक भी मुसलमान या मुसलीम संगठन साथ नही थी , खास बात यह थी पुलिस भी इंकी गुंडागर्दी पर कोई एक्शन नही ले रही थी , पुलिस द्वारा गुंडागर्दी करने की खुली छूट थी l एक भी हिन्दू या हिन्दू संगठन ने दो दिनों तक इस गुंडागर्दी का प्रतिरोध नही किया लेकीन तिसरे दिन बशीरहाट कोर्ट , स्टेशन और आस पास के मुसलमानों की ज़मकर कुटाइ की एवं लगभग 25 से 30 दुकानों का लूट पाट और आगज़नी के हवाले किया l

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इस गुंडागर्दी में कोई हताहत नही हुआ है , बशीरहाट और आस पास के मुसलमानों ने इस बात से इंकार किया है के आर एस एस या बीजेपी ने इस दंगे को प्रायोजित किया है l सौभीक सरकार के घर से लेकर 24 परगना ज़िला के ज़ितने भी लोगों से मैं मिला (खास कर मुसलमानों से) सभी ने आपसी सौहार्द की बात की लेकीन हम कूछ सवाल का ज़वाब चाहते थे ज़िसे वहाँ घुमने और लोगों से बात करने पर पता चला l

1. यह दंगा था या उग्र प्रदर्शन ? आम लोगों के अनुसार यह उग्र प्रदर्शन था ज़िसे निचली स्तर की पत्रकारिता ने दंगा का नाम दे दिया है l

2. स्थानिय आर एस एस और बीजेपी संगठन का ऐसे घटना पर दो दिनों तक खामोश रहने का किया कारण हो सकता है ? आम लोगों के अनुसार यह घटना आर एस एस , बीजेपी और मुफती अबदुल कय्युम एवं मुफती मतीन के बिच फिक्स था ज़िसमें संघी मानसिकता के आला पुलिस अधिकारियों द्वारा गुंडागर्दी की हलकी छूट दी गइ थी ताके बड़े स्तर पर बंगाल को जलाने का बहाना बनाया जा सके l

3. मुफती अबदुल कय्युम , मुफती मतीन एवं अन्य पर तत्काल कारवाइ क्यूँ नही हुइ ? आम लोगों के अनुसार दुसरे दिना गुंडागर्दी करते 22 लोगों की गिरफतारी के बाद भी मुफती अबदुल कय्युम और मुफती मतीन की गिरफतारी नही होना आश्चर्य है , हो सकता है सरकार मामला शांत होने पर कड़ी कारवाइ करे l

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मैं सारा दिन 24 परगना (उत्तर) में रहा , बशीरहाट समेत हर संवेदनशील कहे ज़ाने वाले ज़गह पर गया , आम लोगों से बातें की और पाया के एक उग्र प्रदर्शन के द्वारा पश्चीम बंगाल में बड़े दंगे कराकर अस्थिरता लाने के लिये आर एस एस एवं बी जे पी द्वारा मुफतियों की सौदेबाजी चल रही है l इस पहले टिपु सुलतान मस्जीद के इमाम मुफती बरकती के साथ भी सौदेबाजी हुइ थी लेकीन दोनों सौदेबाजी विफल हुईl

ज़मियत ऊलमा ए हिन्द (पश्चीम बंगाल) ने खुल कर इस गुंडागर्दी के विरुध अभीयान चलाया और खुल कर इन दो मुफतियों के खिलाफ आवाज उठाई l

साथियों सावधान रहिये , इंसाफ पसंद लोगों को साथ लाइये , आर एस एस बी जे पी ने अपना तरिका बदला है लेकीन मुद्दा वही है , संप्रदायिकता के रास्ते सत्ता l 24 परगना में विफल हुइ है , हर मोर्चे पर संप्रदायिक शक्तियों को विफल कीजिये l 24 परगना ज़िला के लोगों ने इसे रिजेक्ट किया है आप भी कीजिये l

ज़िस मिडीया को उग्र प्रदर्शन और दंगा में फर्क पता नही वह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बने रहने का हकदार नही l

24 परगना के हिन्दू मुसलीम एकता को सलाम l

Mustaqim Siddiqui
राष्ट्रीय संयोजक
इंसाफ इंडिया l

यह लेख मुस्तकीम सिद्दीकी की फेसबुक वाल से लिया गया है


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