सहारनपुर | अभी हाल ही में सहारनपुर के गाँव शब्बीरपुर में हुए दलित- राजपूत जातीय संघर्ष के बाद एक संगठन का नाम काफी चर्चा में है. इसी संगठन ने सहारनपुर में ऐसा उत्पात मचाया की पुलिस को भी भागने पर मजबूर कर दिया. मंगलवार को सहारनपुर के गाँधी पार्क में आयोजित की गयी दलित पंचायत का आह्वाहन इसी संगठन ने किया था. इस पंचायत की वजह से ही सहारनपुर में बवाल हुआ.

इस संगठन का नाम ‘भीम आर्मी’ है. करीब दो साल पहले अस्तित्व में आये इस संगठन ने सहारनपुर में बड़ी पहचान बना ली है. छुटमलपुर के रहने वाले सतीश कुमार ने दो साल पहले भीम आर्मी का गठन किया था. दरअसल सतीश पिछले 10 साल से शिव सेना जैसे किसी संगठन को अस्तित्व में लाने का सपना देख रहे थे. लेकिन उसके लिए उन्हें कोई लीडर नही मिल रहा था जो इसकी कमान संभाल सके.

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इसी दौरान सहारनपुर के एक कॉलेज एएचपी कॉलेज में एक शख्स की काफी चर्चा होने लगी. दरअसल इस कॉलेज में राजपूत छात्रों का प्रभुत्व था. इसलिए दलित छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता था. उनकी बैठने की व्यवस्था अलग थी, पीने के पानी का नल भी अलग था. इसी दौरान वहां एक छात्र चंद्रशेखर ने इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई. उसने इस प्रथा को मानने से इनकार कर राजपूत छात्रों से सीधे सीधे टकराव मोल ले लिया.

उस समय रोजाना राजपूत और दलित छात्रों में संघर्ष होने लगा. लेकिन इस संघर्ष ने कॉलेज में राजपूत के प्रभुत्व को जरुरु कम कर दिया. सतीश को भी एक ऐसे ही शख्स की तलाश थी जो भीम आर्मी को नेतृत्व प्रदान कर सके. बस यही से चंद्रशेखर को इसकी कमान सौप दी गयी. पिछले दो साल में यह संगठन , कम से कम सहारनपुर में दलित क्रांति का प्रतीक बन चूका है.

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हालाँकि अभी तक सब इस संगठन की ताकत से अनजान थे लेकिन शब्बीरपुर गाँव में दलित-राजपूत संघर्ष के बाद जिस तरह भीम आर्मी ने मोर्चा संभाला उसने पुलिस तक को हतप्रभ कर दिया. मंगलवार को राजपूत आरोपियों की गिरफ़्तारी और दलितों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर भीम आर्मी ने ही पंचायत बुलाई थी. लेकिन पुलिस ने इसकी इजाजत नही दी थी.

इजाजत नही मिलने के बावजूद भीम आर्मी ने एलान किया था की वो पंचायत करेंगे. इसलिए मंगलवार को सहारनपुर के गाँधी पार्क में दलित युवाओ को भीड़ जुटनी शुरू हो गयी. जिसको रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग का सहारा लिया. जिसके बाद हालात और बिगड़ गए. शायद पुलिस को भी अंदाजा नही था की यह आर्मी उन पर भी भारी पड़ेगी. संगठन के लोगो ने पुलिस को दौड़ा दौड़ा कर पीटा और कई गाडियों में आग लगा दी.

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मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया की जिस भी गाडी या दुपहिया वाहन पर भगवा गमछा या बीजेपी का झंडा दिखाई दिया उसको आग के हवाले कर दिया गया. इसके अलावा जिन गाडियों पर राजपूत लिखा हुआ था उनको भी आग लगा दी गयी. इतना सब होने के बाद भीम आर्मी के कर्ता धर्ताओ के खिलाफ मुक़दमे दर्ज किये जा रहे है. पुलिस चाहेगी की जल्द से जल्द इस संगठन के नेताओ की गिरफ़्तारी हो जिससे भीम आर्मी की कमर तोड़ी जा सके.


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