प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के म्यांमार दौरे के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर भारत कोई नरमी नहीं बरतने वाला है.

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि रोहिंग्या अवैध आप्रवासी हैं और उनको उनके मुल्क भेजा जाएगा. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय संगठनों  को इस मुद्दे पर भारत को प्रवचन नहीं देना चाहिए.

रिजिजू ने कहा कि भारत सरकार पहले ही राज्यों से कह चुकी है कि रोहिंग्या शरणार्थियों के मामले में वे टास्क फोर्स बनाएं और अवैध रुप से यहां आने वाले शरणार्थियों की पहचान करके उन्हें वापस भेजने के लिए उचित कदम उठाएं. उन्होंने कहा, “मैं अंतरराष्ट्रीय संगठनों से कहना चाहता हूं कि चाहे रोहिंग्या संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के तहत पंजीकृत हैं या नहीं, वे भारत में अवैध आप्रवासी हैं.”

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गृह राज्यमंत्री ने कहा, “चूंकि वे वैध आप्रवासी नहीं हैं इसलिए उन्हें उनके मुल्क भेजा जाना है. कानून के अनुसार उन्हें देश से निकाला जाना है, क्योंकि वे अवैध आप्रवासी हैं. हम महान लोकतांत्रिक परंपराओं वाले देश हैं. भारत ने दुनिया में अधिकतम संख्या में शरणार्थियों को जगह दी है, इसलिए किसी को भी शरणार्थियों से कैसे बर्ताव किया जाए इस पर भारत को नसीहत नहीं देनी चाहिये.

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रिजिजू ने कहा, “हम कानूनी रास्ता अपना रहे हैं, तब क्यों हम पर अमानवीय होने का आरोप लगाया जा रहा है.” सरकार का अनुमान है कि इस वक्त देश में लगभग 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी भारत में हैं.


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