केरल के जिस मंदिर में आतिशबाज़ी के दौरान आग लगी वहां तयशुदा मात्रा से 10 गुना ज़्यादा पटाख़े मौजूद थे.

बीबीसी हिंदी को इस बात की जानकारी देते हुए भारत सरकार के पेट्रोलियम तथा विस्फोटक सुरक्षा संगठन के डेप्युटी चीफ़ कंट्रोलर आर वेणुगोपाल ने ये भी बताया कि उनकी टीम को पोटैशियम क्लोराइड जैसे रसायन के प्रमाण भी मिले हैं.

उन्होंने कहा, “क़ानून के अनुसार एक वक़्त पर किसी जगह पर 15 किलो से ज़्यादा पटाख़े नहीं रखे जा सकते हैं लेकिन पारावुर के पुतिंग्गल मंदिर में दुर्घटना के समय कम से कम डेढ सौ किलो से ज़्यादा पटाख़े मौजूद रहे होंगे. हैरानी है कि इतने बड़े ज़ख़ीरे की सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं किया गया था.”

आर वेणुगोपाल के मुताबिक़ अभी तक की जांच से लगता है कि पटाखे स्थानीय स्तर पर ही तैयार किए गए थे. आतिशबाज़ी के दौरान लगी आग में 108 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 400 घायल हुए. मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए जा चुके हैं और 10 से अधिक लोगों से हिरासत में पूछताछ जारी है.

केरल के पुलिस महानिदेशक टीपी सेनकुमर ने बीबीसी हिंदी से कहा है कि मामले की जांच सीबी-सीआईडी कर रही है और पटाख़ों में आग लगने की असल वजह का पता लगाया जा रहा है. सेनकुमर के मुताबिक़ मंदिरों में आतिशबाज़ी के लिए पटाख़ों की मात्रा निर्धारित होती है. लेकिन ये नियम अलग-अलग मंदिरों के लिए अलग-अलग है.

कोल्लम प्रशासन शुरू से कहती रही है कि उसने आतिशबाज़ी की इजाज़त देने से मना कर दिया था. ज़िलाधिकारी ने ऐसा बयान दिया है कि पुलिस ने आतिशबाज़ी कैसे होने दी.

सवाल ये भी हो रहे हैं कि आतिशबाज़ी पहली बार नहीं की जा रही थी तो फिर सुरक्षा की इंतज़ाम कैसे नहीं किए गए. इसके लंबे समय तक होने का पता वैसे भी चलता है कि वहां रात के दो से तीन बजे के बीच आठ से 10 हज़ार तक श्रद्धालु मौजूद थे. (BBC)


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें