नई दिल्ली | दिल्ली की केजरीवाल सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य में अभूतपूर्व काम कर रही है. लेकिन जिस समस्या से दिल्ली वाले सबसे ज्यादा परेशान है , वो है पीने का साफ़ पानी. आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से पहले तो हालात इतने ख़राब थे की दिल्ली की 60 फीसदी कॉलोनियो में पीने की पाइप लाइन ही नही थी. अरविन्द केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में भी सुधार देखने को मिला है लेकिन उतनी तेजी से नही जितना शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम हुआ है.

यही वजह है की केजरीवाल ने जल मंत्रालय में ही दो बार मंत्रियो का फेरबदल कर दिया. लेकिन फिर भी मामला पटरी पर आता नही दिखाई दे रहा. इसलिए अब केजरीवाल ने इस मंत्रालय का कार्यभार खुद सँभालने का फैसला किया है. मिली जानकारी के अनुसार केजरीवाल ने जल मंत्री राजेंद्र गौतम की जगह अब खुद इस विभाग की जिम्मेदारी ले ली है. इस बारे में उपराज्यपाल से भी अनुमति ले ली गयी है.

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मंत्रिमडल में हुए मामूली फेरबदल को उपराज्यपाल की और से मंजूरी मिल चुकी है. इसलिए सोमवार से केजरीवाल जल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे. इस दौरान वो जल विभाग के सभी अधिकारियो से अभी तक हुए काम की जानकारी लेंगे और उसकी समीक्षा करेंगे. इसी के साथ केजरीवाल दिल्ली जल बोर्ड के चेयरमैन भी होंगे. ऐसा कर केजरीवाल ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है.

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दरअसल केजरीवाल के रोजाना लगने वाले जनता दरबार और बवाना उपचुनाव के प्रचार के दौरान केजरीवाल के पास पानी को लेकर कई शिकायते आई. कही पीने के साफ़ पानी की तो कई सीवर लाइन की समस्या थी. जब इस बारे में राजेंद्र गौतम से पुछा गया तो उनका कहना था की अभी भी कई जल विभाग के अधिकारी ऐसी समस्याओ की और ध्यान नही दे रहे है. वो केवल बड़े प्रोजेक्ट पर ही ध्यान दे रहे है.

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जल मंत्री से मिले फीडबैक के आधार पर केजरीवाल ने जल मंत्रालय अपने पास लेने का फैसला किया. दूसरा सरकार बनने के ढाई साल बाद तक भी केजरीवाल के पास कोई मंत्रालय नही था. विपक्ष उन पर बिना जिम्मेदारी का मुख्यमंत्री होने का आरोप लगाता था. केजरीवाल के इस फैसले से यह आरोप भी धुल जायेगा. वही केजरीवाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती दिसम्बर तक दिल्ली की सभी कॉलोनियो में पानी की पाइपलाइन पहुँचाना रहेगी जो उन्होंने अपने मैनिफेस्टो में वादा किया हुआ है.


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