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जनगणना के फॉर्म में हर नागरिक से बुनियादी सूचना देने के अलावा इस बात की भी जानकारी मांगी गई है उसका धर्म, सम्प्रदाय क्या है और किसी आतंकी संगठन या अलगाववादी ग्रुप से ताल्लुक तो नहीं है.

फॉर्म में रहने का पहला पता, पहली जगह बदलने की तारीख, रिश्तेदारों की संख्या, मकान की क़ीमत के अलावा दुकानों, परिवार के हर शख्स का मोबाइल नंबर, आमदनी, पेशा और गाड़ियों की संख्या की भी जानकारी मांगी गई है.

एक कॉलम में ये भी कहा गया है कि अगर किसी बेटी की शादी बाहर हुई है तो उसका पूरा पता और मोबाइल नंबर भी लिखा जाए.

फॉर्म पर ऊपर ‘हाउस होल्ड डिटेल’ लिखा गया है.

काश्मीर

श्रीनगर के एसएसपी अमित कुमार कहते हैं, “इसका मक़सद श्रीनगर में बाहर से आने वालों की जानकारी हासिल करना है. धर्म, संप्रदाय के बारे में जानकारी देना कोई ज़रूरी नहीं.”

अलगाववादियों ने पुलिस की तरफ से इस तरह की जनगणना की तीखी आलोचना की है और प्रदर्शन की धमकी दी है.

हुर्रियत कांफ्रेंस (गिलानी गुट) के प्रवक्ता अयाज़ अकबर ने बीबीसी से इस जनगणना को संदिग्ध बताया.

उन्होंने कहा, “हमारी सूचना के मुताबिक़ ये जनगणना पूरी कश्मीर में हो रही है. दूर दराज़ इलाकों में ये काम सेना कर रही है. ये सब कुछ कश्मीरियों को बांटने और दहशत फैलाने की साज़िश है.”

हालांकि बीजेपी इस क़दम की सराहना कर रही है. कश्मीर बीजेपी यूनिट के मीडिया इंचार्ज अल्ताफ ठाकुर ने इसे सही ठहराया है.

श्रीनगर के एक आम नागरिक ज़ाहिद रशीद खान कहते हैं कि वह इस तरह की जनगणना का बहिष्कार करेंगे.उन्होंने कहा “जनगणना में घर की सारी लड़कियों के मोबाइल नंबर मांगे गए हैं. धर्म, सम्प्रदाय पूछा जा रहा है, ये ग़लत है.”

कश्मीर में काम करने वाले मानवाधिकार के कार्यकर्ता जनगणना को साज़िश बताते हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ कहते हैं, “यह काम पुलिस का नहीं है. सेना कश्मीर में इस तरह की जनगणना कई इलाकों में करती रही है. ये आपस में लड़ाने की साजिश है.”


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