देशद्रोह के मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को अंतरिम ज़मानत मिलने के बाद उनकी मां मीना देवी कहती हैं कि वे अपने बेटे को सलाह देंगी कि वह ग़द्दारों से बचकर रहे.

कन्हैया की मां मीना

मीना देवी ने कहा, “मैं उन्हें सलाह दूँगी ग़द्दारों से बचकर रहो. दोस्त भी ग़द्दारी करता है, उससे बचकर रहो.” वे पूछती हैं, “इसके सिवाय मां और क्या सलाह दे सकती है.”

उनका कहना है कि उनका बेटा निर्दोष है और उसका बरी होना पहली जीत है. उन्हें संविधान पर पूरा भरोसा है और झूठ-सच का यह जो मामला फँसाया गया था इस पर आए फ़ैसले के बाद वे खुश हैं.

मीना कुमारी कहती हैं कि कन्हैया को साज़िश के तहत फँसाया गया है और उन्हें अपने बेटे पर पूरा भरोसा था.

कन्हैया की गिरफ़्तारी के बारे में वह कहती हैं कि सब कुछ एकाएक हुआ था. वह कहती हैं, “मन तो होता था बात करने के लिए, लेकिन लाचार थी. बेटे से कैसे बात करती?”

वे बताती हैं कि कन्हैया की गिरफ़्तारी के बाद पास के गांवों के जो लोग मिलने आते थे, कहते थे कि बच्चा ग़रीब है या बिहार का है, इसलिए उसे फँसाया जा रहा है.

वहीं कन्हैया के पिता जयशकर सिंह कहते हैं कि पूरा गांव कन्हैया की ज़मानत से ख़ुश है.

कन्हैया पर लगे देशद्रोह के आरोप पर वे कहते हैं कि वह “विरोधियों की साज़िश का शिकार हुआ.” वे कहते हैं, “विरोधी लोगों की साज़िश थी फँसाने की.”

जयशंकर कहते हैं कि कन्हैया वामपंथी विचारधारा से जुड़े हैं. वहां (जेएनयू में) आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी की सांठगांठ है और कन्हैया ने जेएनयू में चुनावों में उनके उम्मीदवार को हरा दिया था. इसीलिए उन्हें टारगेट किया गया.

वे कहते हैं कि वे उन्हें अच्छा इंसान बने रहने और अपने संकल्प पर कायम रहने का सुझाव देंगे.

कन्हैया कुमार को 10 हज़ार रुपए के मुचलके पर छह महीने के लिए ज़मानत दी गई है.

(कन्हैया कुमार की मां मीना देवी और पिता जयशकर सिंह के साथ बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह की बातचीत पर आधारित)


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