कन्हैया ने दावा किया कि भाजपा ‘राष्ट्रवाद’ का मुद्दा इस वजह से उछाल रही है, क्योंकि उसने विकास के जो वादे किए थे वे पूरे नहीं हो सके हैं।

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने गुरुवार (24 मार्च) को इरादा जाहिर किया कि वह जातिवाद और आर्थिक असमानता के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। हालांकि, उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों में चुनाव प्रचार करने से इनकार कर दिया। दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी के मुद्दे पर प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए आए कन्हैया को बुधवार (23 मार्च) को हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (एचसीयू) परिसर में दाखिल होने से रोक दिया गया था।

कन्हैया को गुरुवार (24 मार्च) को उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ा जब एक शख्स ने ‘‘संवैधानिक अधिकार’’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार के दौरान उन पर जूता फेंक दिया। हालांकि, वह जूता कन्हैया को नहीं लगा और मंच से ठीक आगे जाकर गिरा बागलिंगमपल्ली इलाके में वामपंथी पार्टियों की ओर से संचालित सुंदरैया विज्ञान केंद्रम (एसवीके) में यह सेमिनार आयोजित किया गया था। पुलिस ने कन्हैया पर जूता फेंकने वाले शख्स को हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद सेमिनार में थोड़ी बाधा पैदा हुई, लेकिन कार्यक्रम जारी रहा।

दो दिन पहले कुलपति अप्पा राव पोडिले के फिर से पदभार संभालने के मुद्दे पर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिंसा हुई थी। लेकिन गुरुवार को माहौल शांतिपूर्ण रहा। 22 मार्च को कुलपति आवास में छात्रों की ओर से की गई तोड़फोड़ के विरोध में हड़ताल कर रहे विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मी गुरुवार (24 मार्च) को काम पर लौट आए।

जूता फेंकने की घटना के बाद अपना भाषण फिर शुरू करने वाले कन्हैया ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। कन्हैया ने कहा, ‘‘आज, चाहे कोई भी हो, चाहे मार्क्सवादी हो, अंबेडकरवादी हो, समाजवादी हो, लोहियावादी हो या मध्यमार्गी हो….आज सभी तरह के लोगों पर हमला हो रहा है, क्योंकि आज लोकतंत्र पर हमला हो रहा है।’’

कन्हैया ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने नरेंद्र मोदी की आलोचना इसलिए की क्योंकि वह प्रधानमंत्री हैं। कन्हैया ने एक कविता भी सुनाई जिसमें काला धन लाने, महंगाई पर काबू पाने और रोजगार मुहैया कराने सहित भाजपा के कई वादों का जिक्र था। जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि रोहित वेमुला मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए उनके मामले को उछाला जा रहा था। उन्होंने विश्वविद्यालयों में भेदभाव खत्म करने के मकसद से ‘रोहित कानून’ बनाने की मांग का समर्थन किया।

इस बीच, पुलिस ने कहा कि सेमिनार के दौरान कन्हैया पर जूता फेंकने वाले शख्स की पहचान नरेश कुमार और पवन कुमार के तौर पर हुई है और ये दोनों ‘गोमाता रक्षा समिति’ के सदस्य हैं। दूसरी ओर, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय ने दावा किया कि विश्वविद्यालय अधिकारियों ने पानी और इंटरनेट की सुविधा कभी बंद नहीं की थी, बल्कि इस पर ‘‘अस्थायी तौर पर’’ रोक लगाई गई थी क्योंकि छात्रों के प्रदर्शन की वजह से ये सुविधाएं प्रभावित हुई थीं।

अधिकारियों ने कहा कि जलापूर्ति अस्थायी तौर पर रोकी गई थी क्योंकि कुछ बदमाशों ने पंप को नुकसान पहुंचाया था। एक बयान में अधिकारियों ने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय ने परिसर में कभी पानी या बिजली सुविधा नहीं बंद की। कुछ बदमाशों ने परिसर में पंप को नुकसान पहुंचाया था और अब उसे ठीक किया जा चुका है। यह भी गौर करना चाहिए कि परिसर में पिछले दो महीने से पानी की किल्लत है।’’

बहरहाल, कन्हैया ने दावा किया कि भाजपा ‘राष्ट्रवाद’ का मुद्दा इस वजह से उछाल रही है, क्योंकि उसने विकास के जो वादे किए थे वे पूरे नहीं हो सके हैं। उन्होंने कहा कि एक भाषा, एक धर्म, एक जाति या एक लिंग की बातें करना राष्ट्रवाद नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत देशों का देश है और हमें भारतीय राष्ट्रवाद के संदर्भ में हर तरह की राष्ट्रीयताओं का सम्मान करना चाहिए। खासकर इस बाबत कि राष्ट्रवाद के समर्थन में हमें कहां खड़े होना है। हमें जातिवादी, ब्राह्मणवादी हिंदू राष्ट्रवाद का समर्थन नहीं करना है। यही हमारा रुख है।’’ भगवाकरण के आरोपों पर कन्हैया ने कहा, ‘‘आप ‘भारत माता’ पर कब्जा नहीं जमा सकते।’’

हैदराबाद और आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के दो दिवसीय दौरे पर पर आए कन्हैया ने पहले पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एनडीए सरकार में विश्वविद्यालयों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम राजनीति कर रहे हैं या सरकार राजनीति कर रही है? विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता खत्म करने के लिए सरकार के पास सुनियोजित पटकथा है… विश्वविद्यालयों, बुद्धिजीवियों का असल काम आलोचनापूर्ण सोच को बढ़ावा देना है।’’

कन्हैया ने यह भी कहा कि वह कुछ राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों में प्रचार नहीं करेंगे। उन्होंने एफटीआईआई, अलीगढ़ विश्वविद्यालय, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के उदाहरण देते हुए दावा किया कि इन परिसरों को युद्ध का मैदान बना दिया गया है क्योंकि कुछ छात्र संगठन सरकार के लिए काम कर रहे हैं।

कन्हैया ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के दो साल के शासनकाल में विकास का एजेंडा कहीं पीछे छूट गया है। उन्होंने कहा, ‘‘‘देशभक्ति’ और ‘मोदी-भक्ति’ के बीच फर्क होता है। कुछ लोग ‘मोदी-भक्ति’ को ‘देशभक्ति’ साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।’’ कन्हैया ने आरोप लगाया कि सैनिकों को छात्रों के खिलाफ भड़काने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि सैनिक, किसान और रोहित वेमुला जैसे छात्र शहीद हैं और वे एक-दूसरे के खिलाफ नहीं लड़ सकते।’’

यह पूछे जाने कि रोहित की मां की तुलना भगत सिंह की मां से करने की वजह से क्या वह रोहित की तुलना भगत सिंह से कर रहे हैं, इस पर कन्हैया ने कहा कि ‘मनुवाद’ का निशाना होने के कारण रोहित ‘शहीद’ हुआ। कन्हैया ने कहा कि संविधान ‘‘सच्ची देशभक्ति’’ की बातें करता है। उन्होंने कहा कि ‘जय जवान, जय किसान और जय संविधान’ का नारा लगाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मनुवाद और अस्पृश्यता से आजादी मिलनी चाहिए।’’ (jansatta)


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