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कैराना में कथित पलायन की सच्चाई को जानने के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की टीम सोमवार को कैराना पहुंची. दो सदस्य टीम ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य कैराना पलायन की सच्चाई को जानना और दंगे के बाद की स्थिति को समझना है.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की इस टीम ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की रिपोर्ट को नकार दिया जिसमे पलायन को सांप्रदायिक बताया गया था. अल्पसंख्यक आयोग की दो सदस्यों परवीन दावर और फरीदा अब्दुल्ला खान ने इस बारें में कहा कि मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित न होकर ‘‘सांप्रदायिक रंग’’ पर आधारित है. उन्होंने आगे कहा, कैराना का पलायन सांप्रदायिक प्रकृति का नहीं है. उन्होंने कहा कि हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने अन्य स्थानों में बेहतर कारोबारी मौके पाने के लिए कैराना छोड़ा.

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उन्होंने आगे कहा, कैराना से हिन्दू या मुस्लिम सभी परिवार बाहर गये हैं, लेकिन उनके पलायन के पीछे डर व भय का मुख्य कारण नहीं. वे व्यवसायिक कारणों के चलते अपना शहर छोड़कर गये हैं. जांच के दौरान इस बात के कोई सुबूत नहीं मिले जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि वहां से हिंदुओं का पलायन हुआ है. इसलिए एनएचआरसी की पहले के रिपोर्ट को सही नहीं ठहराया जा सकता है.

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बैठक के बाद आयोग की टीम ने शाहपुर में दंगा विस्थापितों के बीच जाकर उनकी बस्तियों में मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया.


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