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पीडीपी के संस्थापक सदस्य तारिक हमीद कर्रा ने इस्तीफे की घोषणा के पांच दिन बाद आज औपचारिक तौर पर लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। ये इस्तीफा उन्होंने कश्मीर में हिंसा को खत्म करने की दिशा में संसद के कोई भी ठोस कदम उठाने में विफल रहने के विरोध में दिया है।

श्रीनगर संसदीय क्षेत्र से पीडीपी सांसद ने कहा कि उन्होंने निरंतर हत्याओं और गंभीर रूप से लोगों को घायल किए जाने और कश्मीर के लोगों का दमन किए जाने और इस दुखद स्थिति का समाधान ढूंढने में संसद, केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार के विफल रहने के खिलाफ अपना ‘जोरदार विरोध’ दर्ज कराने के लिए यह कदम उठाया।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘कश्मीर में व्याप्त हालात न सिर्फ खतरनाक बल्कि दुखद भी हैं। प्रतिदिन घायलों की संख्या अस्पतालों की क्षमताओं से बढ़ती जा रही हैं और गिरफ्तार लोगों की संख्या हिरासत में रखने की क्षमता से बढ़ती जा रही हैं।’’
लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर के इतिहास में पहली बार कश्मीर के लोगों को ईद की नमाज नहीं पढ़ने को मजबूर किया गया।’’ उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से 15 सितंबर से उनका इस्तीफा स्वीकार करने को कहा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ‘जो बेहद गंभीर है’, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसका जवाब देने की अविलंब जरूरत है।
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