कोलकाता हाइकोर्ट के जज सीएस कर्णन ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जेएस खेहर समेत सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया हैं. उन्होंने अपने आदेश में कहा कि ये जज उनके सामने पेश नहीं हुए.

जस्टिस कर्णन ने आर्टिकल 226 और क्रमिनल प्रोसीजर कोड 482 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए “देश के हित में और जनता को करप्शन और अशांति से बचाने’ के लिए ये गैरजमानती वारंट जारी किया. ऑर्डर में सातों जजों को 8 मई को पेश होने की बात कही गई है और साथ ही ये भी कहा गया कि न तो ये लोग पेश हुए और न ही किसी ने इन्हें रिप्रेजेंट किया.
वहीँ दूसरी और कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर  अगर राज्य के पुलिस महानिदेशक ने जबरदस्ती उनका (जस्टिस कर्णन) मेडिकल परीक्षण कराया तो वह स्वत: संज्ञान लेकर डीजीपी को सस्पेंड कर देंगे. जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा, दिल्ली के डीजीपी को ऑर्डर देता हूं कि वो सातों आरोपी जजों (मामले की सुनवाई कर रही बेंच के जज) का एम्स में मेंटल चेकअप कराएं.
31 मार्च को पेशी के दौरान जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच से कहा था कि आप मेरा ज्यूडिशियल कामकाज बहाल कर दें, नहीं तो मेरी दिमागी हालत सही नहीं हो पाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम देख रहे हैं उनकी (जस्टिस कर्णन) दिमागी हालत ठीक नहीं लगती और उन्हें समझ भी नहीं आता कि हकीकत में वो क्या कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन की मेंटल कंडीशन की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने ऑर्डर दिया था.
कोर्ट ने उनकी मांग खारिज कर दी थी. इसके बाद कर्णन ने इस मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के सातों जजों के खिलाफ ऑर्डर जारी कर दिया था. जस्टिस कर्णन का आरोप था कि इन जजों ने ‘प्रिंसिपल ऑफ नैचुरल जस्टिस’ का वॉयलेशन किया है.

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