भारतीय मीडिया ने भले ही जेएनयू में ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ के नारे लगाने के मामले को तुल दिया हो, लेकिन दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बयान करती है.

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दरअसल, जेएनयू में नारेबाजी के मामले में दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जेएनयू में कार्यक्रम के दौरान कुल 29 नारे लगाए गए, लेकिन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का कोई नारा नहीं लगा था.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के एक ख़बर के मुताबिक़ दिल्ली पुलिस (साउथ) के डिप्टी कमिश्नर प्रेमनाथ ने ‘ए ब्रीफ बैकग्राउंड एंड फैक्चुअल नोट ऑन द इंसीडेन्ट ऐट जेएनयू रिगार्डिंग केस एफआईआर नम्बर 110/16 दिनांक 11.02.2016’ विषय पर एक रिपोर्ट दिल्ली के कमिश्नर बी.एस. बस्सी को सौंपा है.

12 पन्ने की इस रिपोर्ट में इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ़ज़ल की बरसी के दौरान कार्यक्रम में कई तरह के नारे गूंजे थे, लेकिन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा नहीं गूजा था. इस रिपोर्ट में 29 नारों की चर्चा है, लेकिन ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे का कोई जिक्र नहीं है.

इस जांच रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों को भी शामिल किया गया है, जिनमें विश्वविद्यालय के छात्र और स्टाफ शामिल हैं.

गौरतलब है कि जेएनयू कैम्पस में 9 फरवरी की रात को संसद पर हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु के ‘शहादत दिवस’ की बरसी मनाई गई और इस मौके पर देश-विरोधी नारे लगाए गए. आरोप है कि यहां पर कुछ छात्रों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसे देशद्रोही नारे लगाए थे.

ये ख़बर जी-न्यूज़ नामक एक निजी चैनल ने दिखाया था. चैनल के इस रिपोर्ट में ‘पाकिस्तान ज़िन्दाबाद’ के नारे भी सुनाई दे रहे हैं.

12 फरवरी को इसी निजी टेलीविजन चैनल की फुटेज के आधार पर बीजेपी सांसद महेश गिरी ने एक मामला दर्ज कराया था और फिर जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ़्तारी हुई थी.

हालांकि रविवार को पत्रकार विश्व दीपक ने ज़ी न्यूज़ से इस्तीफा देते हुए बताया कि -‘वीडियो में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा था ही नहीं, उसे हमने बार-बार हमने उन्माद फैलाने के लिए चलाया था.’


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