नई दिल्ली: हिन्दुस्तान की मशहूर यूनिवर्सिटी जवाहर लाल यूनिवर्सिटी में हुए हंगामे के बाद कुछ लोग जहां यूनिवर्सिटी को देशद्रोही साबित करने में लग गए हैं वहीँ धीरे धीरे परते खुलने पे पता लग रहा है कि या तो कुछ बातें झूठी थीं या फिर कोई साज़िश थी.

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जहां कुछ मीडिया हाउसेस ने ये साबित करने की भी कोशिश की है कि हफ़ीज़ सईद ने भी जेएनयू के स्टूडेंट्स का समर्थन किया जबकि बाद में पता किया तो ये ख़बर फ़र्ज़ी निकली. असल में जिस ट्विटर अकाउंट को हाफ़िज़ सईद का बताया जा रहा था वो हाफ़िज़ सईद का है ही नहीं क्यूंकि हाफ़िज़ सईद के ट्विटर अकाउंट को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है.
वहीँ लेफ़्ट पार्टियों ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जिन लोगों ने भी भारत विरोधी बातें की हैं वो भी ABVP के लिए ही काम कर रहे हैं. (siasat)


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