तिहाड़ में दो मार्च तक के लिए भेजे गए कन्हैया ने वकील अनिंदिता पुजारी के जरिए दाखिल अर्जी में खुद को निर्दोष बताया है। 

देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने तिहाड़ जेल में अपनी जान को खतरा बताते हुए सीधे सर्वोच्च न्यायालय से जमानत की गुहार लगाई है। न्यायालय कन्हैया की जमानत अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस बीच कन्हैया की गिरफ्तारी के विरोध में गुरुवार को कई अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन हुए। कुछ जवाबी प्रदर्शन भी हुए। इसकी वजह से पुलिस को पटना में दो छात्र संगठनों के बीच झड़प रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। कोलकाता में दो गुटों के बीच टकराव की नौबत आई। विभिन्न दलों ने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए छात्र नेता की रिहाई की मांग की है। गुरुवार को कांगे्रस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘अराजकता की स्थिति और लोकतांत्रिक अधिकारों की समाप्ति’ को रोकने को लेकर फौरन कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से हस्तक्षेप की मांग की। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी राष्ट्रपति से मिले और केंद्र सरकार के रुख की आलोचना की।

तिहाड़ में दो मार्च तक के लिए भेजे गए कन्हैया ने वकील अनिंदिता पुजारी के जरिए दाखिल अर्जी में खुद को निर्दोष बताया है। पटियाला हाउस अदालत में बुधवार को कुछ वकीलों ने कन्हैया पर हमला किया था। कन्हैया ने कहा है कि उनकी जान को खतरा है। उनकी जान को सुरक्षित रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को दखल देने की जरूरत है। जेएनयू के छात्र नेता ने कहा कि उन्हें जेल में बंद रखने से कोई मकसद पूरा नहीं होने वाला, क्योंकि पुलिस उन्हें अदालत में पेश करने में भी मुश्किलों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें हिरासत में रखकर पूछताछ करने की कोई जरूरत नहीं है, उन्हें पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। वरिष्ठ वकील सोली सोराबजी और राजू रामचंद्रन ने न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एएम सप्रे की पीठ के समक्ष कन्हैया की जमानत अर्जी का जिक्र किया और इस पर गुरुवार को ही सुनवाई करने का अनुरोध किया। बहरहाल, जब पीठ ने कहा कि वह शुक्रवार को इस पर सुनवाई करेगी तो दोनों वरिष्ठ वकील सहमत हो गए ।

उधर दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस अदालत में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार व अन्य पर हमले के सिलसिले में मामला दर्ज किया है। वकीलों के कपड़े पहने लोगों ने पत्रकारों, जेएनयू के विद्यार्थियों और शिक्षकों पर हमला किया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर बुधवार देर रात भारतीय दंड संहिता की संबद्ध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया व आरोपी वकीलों को सम्मन भेजे गए। यह अलग बात है कि इस सिलसिले में पुलिस की ओर से सम्मन किए गए तीन वकीलों में कोई भी पेश नहीं हुआ है। तीन वकीलों में एक की पहचान विक्रम सिंह चौहान के रूप में हुई है जबकि अन्य दो के नाम पुलिस ने उजागर नहीं किए हैं। लेकिन भाजपा विधायक ओपी शर्मा जांच में शामिल हो गए। उन्हें भी सम्मन दिया गया था। वे कैमरे में पटियाला हाऊस अदालत में एक भाकपा कार्यकर्ता को पीटते हुए पकड़े गए थे। बुधवार को वकीलों के एक समूह ने विक्रम सिंह चौहान की अगुवाई में पटियाला हाउस अदालत में पत्रकारों और कन्हैया पर हमला किया था। दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा कि अगर तीनों पेश नहीं होते हैं तो पुलिस अदालत जाएगी और वारंट जारी करवाएगी। बस्सी ने कहा कि घटना के बाद पुलिस ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए दो प्राथमिकी दर्ज की हैं और विक्रम सिंह चौहान सहित तीन वकीलों और भाजपा विधायक ओपी शर्मा को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक ओपी शर्मा जांच के सिलसिले में तिलक मार्ग पुलिस थाने में पेश हुए। हालांकि तीन वकील अब तक पुलिस के सामने पेश नहीं हुए हैं।

इस बीच पटियाला हाउस अदालत परिसर में हिंसा के दो दिन बाद कोई भी जोखिम नहीं लेते हुए दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार दिल्ली विश्वविद्यालय के व्याख्याता एसए आर गिलानी को रिमांड की सुनवाई के लिए एक थाने में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। रिमांड की सुनवाई पटियाला हाउस अदालत परिसर के शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। गिलानी को मजिस्ट्रेट ने तीन मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया । उन्हें यहां भारतीय प्रेस क्लब में पिछले हफ्ते के एक कार्यक्रम के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था जहां कथित रूप से राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए थे। आरोपी ने जमानत अर्जी भी दायर की जिस पर शुक्रवार को मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हरविंदर सिंह के सामने सुनवाई होगी। (Jansatta)


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