नई दिल्ली | भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल ऑफ स्पिनर में से एक हरभजन सिंह आजकल अपने एक ट्वीट की वजह से चर्चा में है. प्रधानमन्त्री मोदी को टैग कर किये गए इस ट्वीट में हरभजन ने जेट एयरवेज के एक पायलट पर महिला यात्री से मारपीट करने और नस्लीय टिप्पणी करने का आरोप लगाया. इसके बाद जेट एयरवेज ने कार्यवाही करते हुए पायलट को नौकरी से निकाल दिया.

इसी बात से आहात होकर पायलट ने हरभजन सिंह के ऊपर 96 करोड़ रूपए का मानहानि का मुकदमा किया है. दरअसल भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने आरोप लगाया था की जेट एयरवेज की फ्लाइट में यात्रा के दौरान जर्मन पायलट ब्रंड हॉसलिन ने एक महिला के साथ हाथापाई की और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति को गली दी. यही नही पायलट ने दो भारतीय को अपमानित करते हुए उन्हें फ्लाइट से उतर जाने के लिए भी कहा.

हरभजन ने यह पूरी बात मोदी को टैग करते हुए ट्वीट की. जिसके बाद जेट एयरवेज ने 5 मई को पायलट को नौकरी से निकाल दिया. अब पायलट ब्रंड हॉसलिन के वकील समित शुक्ला ने हरभजन सिंह और उनके दोस्तों को मानहानि का नोटिस भेजा है. इसमें उनके वकील ने लिखा है की हरभजन और उनके दोस्तों ने पायलट पर नस्लीय टिपण्णी करने का झूठा आरोप लगाया है. जिसकी वजह से उनकी नौकरी चली गयी.

भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने पूर्व में विमान कंपनी जेट एयरवेज के पायलट पर एक भारतीय यात्री के खिलाफ ‘नस्ली’ टिप्पणी करने का आरोप लगाया था। हरभजन सिंह ने पायलट पर नस्लीय भेदभाव, महिला और एक दिव्यांग व्यक्ति से मारपीट का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। हरभजन के इस आरोप के बाद पांच मई को जर्मन पायलट ब्रंड हॉसलिन को जेट एयरवेज ने बर्खास्त कर दिया गया था।

इसलिए वकील ने हरभजन और दो अन्य यात्रियों पूजा सिंह गुजराल और जतिंदर सिंह पर मानहानि का मुकादमा करते हुए उनसे 96 करोड़ रूपए हर्जाने के रूप में मांगे है. बताते चले की हरभजन सिंह का आईसीसी चैंपियन ट्राफी के लिए टीम में चयन नही हुआ था जिसके बाद उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी के चयन पर सवाल उठाया था.


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