मुंबई |  राज्यसभा में वन्देमातरम के मुद्दे पर असुदुद्दीन ओवैसी को खरी खोटी सुनाने वाले जावेद अख्तर फ़िलहाल तीन तलाक के विरोध में खड़े नजर आ रहे है. अभी हाल ही में उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर निशाना साधते हुए मांग की थी की तीन तलाक पर पूर्णतया प्रतिबंध लगना चाहिए. उस समय उन्होंने तीन तलाक को शोषण बताते हुए मुस्लिम पर्सनल बोर्ड पर आरोप लगाया था की वो केवल तीन तलाक को टालना चाहते है.

अब जावेद अख्तर ने एक बार फिर मुस्लिम पर्सनल बोर्ड को निशाने पर लिया है. उन्होंने बोर्ड के सुप्रीम कोर्ट में दिए गए बयान को बेतुका बताते हुए कहा की वो खुद भी जानते है की इस तरह की चीजे संभव नही है. दरअसल बोर्ड ने कोर्ट में कहा था की वो निकाह कराने वाले सभी काजियो को एडवाइजरी जारी करेगी की निकाह कराते समय वो निकाहनामे में तीन तलाक पर दुलहन की राय को भी शामिल करे.

बोर्ड के इस बयान की आलोचना करते हुए जावेद अख्तर ने कहा की उनका यह बयान बेतुका है क्योकि वो जानते है की निकाह के समय कोई भी दुल्हन तीन तलाक पर खुलकर अपनी राय नही दे सकती. इसलिए इस बात का कोई मतलब ही नही है. इससे पहले जावेद बोर्ड के उस फैसले की भी निंदा कर चुके है जिसमे उन्होंने कहा था की अगर कोई शख्स शरियत के अनुसार तीन तलाक नही देता है तो उसका बहिष्कार किया जाएगा.

बोर्ड के इस बयान को भी बेतुका बताते हुए जावेद ने कहा था की यह बोर्ड का केवल फर्जीवाडा है. बोर्ड कह रहा है की तीन तलाक का गलत इस्तेमाल करने वाले का बहिष्कार किया जायेगा. मैं पूछता हूँ की तीन तलाक़ के ग़लत इस्तेमाल का मतलब क्या है. कल कोई छेड़खानी के ग़लत इस्तेमाल, पत्नी को पीटने के ग़लत इस्तेमाल या बलात्कार के ग़लत इस्तेमाल की बात कर सकता है. इसलिए इस पर बैन लगना चाहिए.


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