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जमीयत उलेमा ए हिंद ने आतंकवाद के आरोप में फ़साये गए मुसलमानों का केस जकात की रकम से लड़ने का फैसला किया हैं. संस्थान ने मुस्लिमों से अपील की है कि वे जकात आतंक के आरोप में बंद मुस्लिमों के केस लड़ने के लिए दें.

जमीयत उलेमा ए हिंद की लीगल सेल के हेड गुलजार आजमी के अनुसार, ‘कुरान और हदीस में जकात के इस्तेमाल के आठ तरीके बताए हैं। एक तरीका कि कैद में बंद लोगों की मदद करना भी है। आज के वक्त गरीब मुस्लिम आतंक के मामलों में जेल में बंद हैं। हम ऐसे लोगों के लिए लड़ने के लिए मुस्लिमों से मदद मांग रहे हैं। हम पहले जकात फंड की मेडिकल और एजुकेशन के लिए खर्ज करते थे।’

पिछले साल संस्था ने दो करोड़ रुपए, 410 मुस्लिमों का केस लड़ने में खर्च किए थे, ये सभी 52 आतंक के मामलों के आरोप में जेल में बंद थे। इनमें से 108 लोगों के खिलाफ आरोप हटा लिए गए थे।


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