जमीयत-ए-उलमा हिंद प्रमुख, मौलाना अरशद मदनी ने शुक्रवार को कहा कि मुसलमान पैनल रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को देश से निकाल देने के केंद्र के फैसले सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगा.

टीओआई से बात करते हुए, विख्यात मुस्लिम मौलवी ने कहा कि उनके वकील सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग करने के लिए ड्राफ्टिंग तैयार करने में व्यस्त हैं.

मौलाना मदनी ने कहा, “हम सोमवार को अदालत से संपर्क करेंगे, बर्मा (म्यांमार) में भयावह हिंसा से बचकर रोहंगिया मुसलमान यहां आए हैं. अब उन्हें मौत की सजा नहीं दी जानी चाहिए.

उन्होंने कहा कि जब तक हिंसा समाप्त नहीं हो जाती है, शरणार्थियों को वापस नहीं भेजा जा सकता है. ये निर्दोष लोग, भूखे और गरीब लोग हैं. जिन्हें म्यांमार में मारा जा रहा है. मौलाना मदनी ने कहा, कोई भी निर्दोष देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हो सकता है.

महात्मा गांधी का हवाला देते हुए, मौलाना मदनी ने कहा कि भारत शांति का देश है और जिन लोगों का उत्पीड़न हुआ है उनके समर्थन में खड़े रहने का भारत का इतिहास है. “गांधी हिंसा के खिलाफ खड़े थे, उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन में बात की थी, यह हमारा इतिहास है.” रोहिंग्या निहत्थे हैं और उनकी अपने ही देश में सुरक्षा बलों द्वारा हत्या हो रही हैं.

मदनी ने कहा रोहिंग्या मुसलमानों की हत्या या किसी भी अन्य समुदाय से संबंधित हत्या अस्वीकार्य है. यह मानवता की हत्या है.


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