मुस्‍लिम धार्मिक संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद 12 मार्च को दिल्‍ली में एक सेमिनार का आयोजन करेगा। इस कार्यक्रम में कथित तौर पर ‘भारत को हिंदू राष्‍ट्र के तौर पर पेश करने की कुटिल कोशिश’ पर नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से ‘चुप्‍पी बरते जाने’ के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। सेमिनार इंदिरा गांधी इंडोर स्‍टेडियम में होगा। यहां जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के अलावा ईसाई और दलित समुदाय के प्रतिनिधि भी संबोधित करेंगे। कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी के अलावा विपक्ष के कई नेताओं को आमंत्रित किया गया है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के यूपी अध्‍यक्ष मौलाना असद रशीदी ने द इंडियन एक्‍सप्रेस से बातचीत में बताया, ”हम कुछ समूहों और राजनीतिक दलों द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड थोपे जाने और भारत को हिंदू राष्‍ट्र घोषित किए जाने को लेकर चलाए जा रहे कुटिल अभियान के खिलाफ आवाज बुलंद करना चाहते हैं। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि लोकतंत्र को तबाह करने की कोई भी कोशिश इस देश के विभाजन का कारण बनेगी। हमें इसे रोकना चाहिए।” रशीदी ने आरोप लगाया कि लोगों को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की ‘योजनाबद्ध साजिश’ चल रही है। उन्‍होंने कहा,”हम इसे रोकना चाहते हैं। हम अन्‍य अल्‍पसंख्‍यकों और दलितों के साथ मिलकर सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देना चाहते हैं।”

सेमिनार को लेकर जमीयत की ओर से जारी बयान में लिखा है, ”यह गंभीर चिंता का विषय है कि देशप्रेम के नाम पर देश को बांटने की साजिश चल रही है। विभाजनकारी और सांप्रदायिक ताकतें देश के संविधान के धर्मनिरपेक्ष प्रकृति को को बदलकर हिंदू राष्‍ट्र कायम करना चाहती हैं। हाल के महीनों में, अल्‍पसंख्‍यकों और दलितों पर हुए हमलों के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। आरएसएस देश के शैक्षिक संस्‍थानों पर अपनी विचारधारा थोपने की पुरजोर कोशिश में है।” (Jansatta)


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