मुस्लिम संगठन जमात-ए-इस्लामी हिंद ने पूरे देश में शराब पर बैन लगाने की मांग की है। मुस्लिम संस्था ने तर्क दिया है कि इससे सेक्शुअल क्राइम को रोका जा सकेगा। यही नहीं जमात-ए-इस्लामी ने जूवेनाइल की उम्र सीमा घटाने के फैसले को भी सही नहीं ठहराया है। मुस्लिम संस्था का कहना है कि सरकार को जूवेनाइल अपराधों को सामाजिक समस्या के तौर पर देखना चाहिए। इसे रोकने के लिए जड़ों पर प्रहार करना जरूरी होगा।
सैयद जलालुद्दीन उमरी

इस्लामिक संगठन ने कहा कि शराब पर बैन लगाने से कम उम्र में लोगों को बिगड़ने से बचाया जा सकेगा और सेक्शुअल अपराधों पर लगाम कसी जा सकेगी। जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रेजिडेंट सैयद जलालुद्दीन उमरी ने कहा, ’22 दिसंबर को राज्यसभा में जूवेनाइल जस्टिस बिल को मंजूरी दी गई। इस कानून के तहत किशोर अपराधी की उम्र 16 साल मानने का प्रावधान है। ऐसे अपराधों में जिनमें सात साल से अधिक की सजा का प्रावधान होगा, उसमें 16 साल से अधिक उम्र के किशोर को बालिग माना जाएगा। जमात इस बिल का स्वागत करती है, लेकिन हमारा मानना है कि सिर्फ कानून और दंड से ही अपराध को खत्म नहीं किया जा सकता। सेक्शुअल अपराधों को रोकने के लिए कड़ी सजा देना ही एकमात्र रास्ता नहीं है।’

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सैयद जलालुद्दीन उमरी ने कहा कि इस समस्या की जड़ें सामाजिक हैं। इससे सामाजिक स्तर पर भी निपटने की कोशिशें की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमात इस बात में विश्वास करती है कि अपराध मुक्त समाज चरित्र निर्माण के जरिए ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शराब पीने और सेक्शुअल क्राइम के बीच सीधा संबंध है। उन्होंने कहा कि जमात पूरे देश में शराब पर बैन लगाने की मांग करती है। उन्होंने कहा कि हम कथित तौर पर आतंकी संगठन आईएस से संपर्क रखने के आरोप में युवाओं को गिरफ्तार किए जाने की कड़ी निंदा करती है।

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सैयद उमरी ने कहा कि जमात आईएस की गतिविधियों को मान्यता नहीं देती है। उन्होंने कहा कि यदि पश्चिमी देश चाहें तो उसे कुछ दिनों में ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आईएस की ओर से की जा रही गतिविधियां इस्लाम के अनुकूल नहीं हैं। आईएस को पश्चिमी देशों से खाद-पानी मिल रहा है, ताकि उसके बहाने वह सीरिया और मध्य-पूर्व एशियाई देशों में अपना दखल दे सकें। उन्होंने मांग की कि बिना पर्याप्त सबूतों के विभिन्न अपराधों में जेल में बंद किए गए मुस्लिम युवाओं को तत्काल रिहा किया जाए। साभार: नवभारत टाइम्स

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