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अल्पसंख्यकों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस्लामिक बैंकिंग की योजना अभी शुरू ही नहीं हुई की भगवा संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया हैं. विश्व हिन्दू परिषद और हिन्दू महासभा जैसे संगठन खुलकर सरकार के इस फैसले के विरोध में आ गये.

अखिल भारत हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस्लामिक बैंक को मंजूरी दे रही है. जोकि शरीयत के कानून के हिसाब से चलेंगे, जिससे देश का सामाजिक तानाबाना ध्वस्त होने का खतरा है.

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संगठन के प्रवक्ता अशोक पांडे ने पीएम पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी सरकार आतंकवादियों को फंडिंग करने वाले बैंक भारत में खुलवा रही है. उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री का अजान की आवाज सुन कर अपने भाषण को रोक देना इस बात का जीता जागता उदाहरण है.

वहीँ सीनियर भाजपा नेता कृष्ण लाल ढल्ल ने  इस फैसले को असंवैधानिक बताया है. उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक कदम होगा अलगाववाद को बढावा देगा. उन्होंने सरकार और वित्त मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह इस प्रस्ताव को जल्द ही रद्द कर दे.

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गौरतलब रहें कि पूरी दुनिया में करीब 56 देशों में इस्‍लामिक बैंक हैं. इन बैंकों का उद्देश्य उसके सदस्य देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के लिए काम करना है.


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