आईएसआई जासूसी कांड में सबसे पहले बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता की संलिप्ता सामने आई. उसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया. जाँच के बाद खुलासा हुए कि इस कांड में विहिप के कार्यकर्ता भी जुड़े हुए है. अब नए खुलासे में गौरक्षक दल की भी संलिप्ता सामने आ रही हैं.

एटीएस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आशीष सिंह राठौर और सीबी सिंह नामक युवक बलराम के राजदार बताए जा रहे हैं. एटीएस दोनों की तलाश कर रही है. राठौर के पास सतना के जिला गौरक्षा प्रमुख की जिम्मेदारी थी. वहीं, दूसरा सीबी सिंह लोक सेवा केंद्र सतना में कम्प्यूटर ऑपरेटर है जो फिलहाल गायब बताया जा रहा है.

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आशीष सिंह राठौर ठेकेदारी के साथ-साथ नेतागिरी भी करता था और वह विश्व हिन्दू परिषद का सक्रिय पदाधिकारी था. बताया जा रहा है कि बलराम जिन खातों का इस्तेमाल करता था, उनके एवज में तयशुदा रकम उपलब्ध कराता था. बलराम के पास कुल 110 एटीएम कार्ड थे. उन एटीएम की मदद से वह अलग-अलग बैंक खातों से आई रकम को आईएसआई एजेंटों के खातों में डालता था. इसके बैंक खाते मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों में भी थे. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की एटीएस टीमें उससे पूछताछ में जुटी हैं. दिल्ली की स्पेशल सेल भी उससे पूछताछ कर चुकी है.

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बलराम से की गई पूछताछ में एटीएस को पता चला है कि आशीष सिंह राठौर के बैंक खातों में लाखों रुपए का लेनदेन हो रहा था. जिसके बाद एटीएस ने आशीष के बैंक खातों को खंगालना शुरू कर दिया है. इसके लिए सतना के विभिन्न बैंकों को पत्र लिखकर एटीएस ने लेन देन का विवरण भी मंगाया है. इसी तरह से सीबी सिंह भी एटीएस की रडार पर आ गया है. जैसे ही इन दोनों लोगों का नाम बलराम से जोड़ा गया है, ये दोनों अचानक लापता हो गए हैं.

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इस मामले में गिरफ्तार मनीष गांधी, बलराम सिंह, ध्रुव सक्सेना और मोहित अग्रवाल की रिमांड अवधि एटीएस ने चार दिन बढ़वा ली है. एटीएस ने इन चारों के अलावा मनोज भारती और संदीप गुप्ता को भी मंगलवार दोपहर अदालत में पेश किया था। मनोज और संदीप को 27 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

 


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