शायद वे इतने साल तक इसलिए जीवित रहीं क्योंकि मैं उन्हें धमकाता रहता था… तुम चली गई तो तुम्हारे पीछे-पीछे मैं भी चला आऊंगा, मां की मौत पर बोले मुनव्वर राना।

interview of munawwar rana on his mothers death

प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना की मां नहीं रही। वह मां, जिस पर लिखी शायरी ने राना को दुनियाभर में लोकप्रिय बना दिया। मां पर लिखी शायरी की किताब की 10 लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।

मंगलवार को 84 वर्ष की अवस्था में उनका निधन हो गया। उनका नाम आयशा खातून था और वह पिछले काफी समय से बीमार थीं। पीजीआई में उनका इलाज चल रहा था। मुनव्वर ने भर्राए गले से कहा… शायद वे इतने साल तक इसलिए जीवित रहीं क्योंकि मैं उन्हें धमकाता रहता था… तुम चली गई तो तुम्हारे पीछे-पीछे मैं भी चला आऊंगा

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मंगलवार को पीजीआई में जगह न होने पर उनकी सहारा हॉस्पिटल में डायलिसिस की जा रही थी। राना बताते हैं कि मैंने मां पर बहुत लिखा लेकिन मां ने मुझे कभी नहीं सुना था। एक बार मेरे पाकिस्तान जाने का कार्यक्रम बना तो मेरे दोस्त महमूद गोरी ने कहा कि हम एक अलग ढंग का मुशायरा करना चाहते हैं, जिसमें आप मां पर शायरी सुनाएंगे और इस मुशायरे की अध्यक्षता आपकी मां करेंगी।

मां ने मुझे डेढ़ घंटे तक सुना लेकिन परदे में। मैंने भी रचनाएं पढ़ते हुए एक बार भी उसकी ओर नहीं देखा क्योंकि मुझे मालूम था कि अगर एक बार भी उधर नजर की तो आंखें भर आएंगी। राना कहते हैं कि परदे में रहने की उनकी आदत थी।

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मरने के पहले भी वे अस्पताल में परदा ढूंढती रहतीं। कई बार किसी डाक्टर ने यह कहकर फोटो लेना चाहा कि आप मुनव्वर राना की मां हैं तो बोलीं कि मैं परदे से बाहर कैसे आ सकती हूं। राना कहते हैं, मैंने आंखें खोलीं तो अपने पिता के हाथों में ट्रक की स्टेयरिंग देखी। वह उनाव की ट्रांसपोर्ट कम्पनी में काम करते थे।

एक बार जाते तो चार-पांच दिन लौटने में लग जाते। पिता नहीं आते तो अक्सर घर में चूल्हा नहीं जलता था। हमारे जिस्म पर कपड़े हों न हों, दरवाजे पर मां टाट का मोटा परदा जरूर डाले रहती थी। मां के लिए यह परदा तो होता ही था हमारी गरीबी भी ढकी रहती थी।

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राना अपने बचपने के दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि जब भी मैं कभी मां से दूर होता तो वे परेशान हो जातीं, रात-रात भर सोती नहीं थीं। ऐसा इस कारण था कि मुझे नींद में चलने की आदत थी।

मेरे ननिहाल के पास कुआं था। मैं वहां जाता तो वह अपने घर के पास के कुएं के पास बैठी रहतीं और पानी से मेरे लिए दुआं करतीं। उन्हें लगता था कि पानी का पानी से रिश्ता होता है और वह मुझे नींद में कुएं में गिरने से बचा लेगा। (अमर उजाला)


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