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उडी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बड़ते तनाव के बीच आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार को पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते की समीक्षा के लिए बैठक हुई.

इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश सचिव एस जयशंकर, जल संसाधन सचिव एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के अन्य अधिकारी मौजूद थे. हालांकि अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया हैं. माना जा रहा हैं कि चीन की वजह से इस पर निर्नल लेना आसान नहीं हैं. क्योंकि सिंधु नदी चीन नियंत्रित इलाके से निकलती है और चीन के साथ भारत का कोई जल समझौता भी नहीं है.

ये समझौता सितंबर 1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुआ था. इस समझौते के तहत छह नदियों ब्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी को दोनों देशों के बीच बांटा गया था.

भारत में यह मांग लगातार बढ़ रही है कि आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए भारत सिंधु नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े इस समझौते को तोड़ दे. उल्लेखनीय है कि भारत ने पिछले सप्ताह स्पष्ट तौर पर कहा था, इस संधि को जारी रखने के लिए ‘आपसी विश्वास और सहयोग’ बहुत महत्वपूर्ण है.


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