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इजराइल के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को लेकर मुस्लिम संगठनों ने मौर्चा खोल दिया हैं. जमीअत उलेमा ए हिन्द महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने भारत के इजराइल के साथ हो रहे सबंधों को गांधी और नेहरू के विचारों के ख़िलाफ़ बताया.

मौलाना महमूद मदनी ने ज़ायोनी राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन के भारत दौरे की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि गर मोदी सरकार ने तेल अविव-नई दिल्ली संबंधों पर पुनर्विचार न किया तो भारत के राजनैतिक दल व धार्मिक संगठन विरोध प्रदर्शन करेंगे.

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उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार को बच्चों के हत्यारे व अत्याचारी ज़ायोनी शासन के साथ रिश्तों को नहीं बढ़ाना चाहिए क्योंकि यह क़दम भारत के संस्थापकों महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू के विचारों के ख़िलाफ़ है.

मदनी ने कहा कि ज़ायोनी शासन के साथ आर्थिक व व्यापारिक संबंध बनाने की स्थिति में हम भी इस्राईल के अत्याचारों में सहभागी माने पाएंगे, क्योंकि पिछले 25 साल से इस्राईल ने बहुत से बेगुनाह बच्चों और औरतों की हत्याएं कीं और वह निरंतर अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का मखौल उड़ा रहा है, इसलिए एक अतिक्रमणकारी शासन से कूटनैतिक संबंध बनाना निंदनीय है.

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इसके साथ ही महमूद मदनी ने भारत सरकार से मांग करते हुए कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह इस्राईल को सरकारी आतंकवाद के प्रतीक के रूप में दुनिया भर में पहचनवाए.


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