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असम में भारतीय अधिकारीयो ने राज्य की मुस्लिम आबादी को कम दिखाने के लिए अवैध बांग्लादेशी निर्वासितो को के नाम पर असमी मुस्लिमों को भी पंजीकृत करना शुरू कर दिया हैं. इन सभी को वापस बांग्लादेश भेजे जाने की तैयारी की जा रही हैं.

असम के वित्त मंत्री वाशिंगटन पोस्ट को इस बारें में बताया कि ‘असम के साथ बांग्लादेश की एक लंबी सीमा हैं. जिसकों ज्यादातर झीलों के जरिये आसानी से नाव द्वारा पार किया जा सकता हैं. भारतीय सेना अपनी सीमा बल का एक बड़ा हिस्सा सैकड़ों मील की दूरी पर पाकिस्तानी सीमा पर तैनात कर रही हैं. विशेषकर कश्मीर के विवादित इलाके क्लस्टर पर.

भारतीय अधिकारियों को अब चिंता है कि बांग्लादेशी इस्लामी आतंकवादी संगठनों जैसे इस्लामिक स्टेट के रूप में अवैध आप्रवासियों की तरह भारत में घुसपैठ कर सकते हैं. अधिकारियों ने बताया कि ऐसे में बांग्लादेश से अवैध आप्रवासियों का पता लगाने के बेहद मुश्किल हो जाएगा. क्योंकि वे पहचान के फर्जी दस्तावेज का सहारा लेते हैं. और वे मतदान भी कर चुके हैं.

अधिकारियों ने आगे कहा कि ऐसे में उनकी पहली प्राथमिकता होती हैं कि वे किसी भी तरह मतदाता सूची में  अपना नाम दर्ज कराने की कोशिश करते हैं. इसके लिए वे रिश्वत देते हैं.

भारतीय जनगणना के आंकड़ों डिजिटाईज़िंग के बाद अधिकारियों ने पता लगाया कि जो 31 लोगों एक ही माता की संतान होने का दावा कर रहे थे. वहीँ एक और बड़े ग्रुप ने उसी औरत को अपनी माँ होने का दावा किया. जांच के दौरान भारतीय अधिकारियों के लिए इन दावेदारों की ‘जन्म तिथि और माँ के बारे में जानने के लिए काफी उत्सुकता रही.

असम के एक हिंदू निवासी ने कहा कि ऐसे लोग राज्य भर में कई जगह फैले हुए हैं. हम उत्सुकता से अपनी कागजी कार्रवाई खत्म करने और उन्हें उखाड़ सरकार के लिए इंतजार कर रहे हैं. भारत और बांग्लादेश के कोई आधिकारिक संधि की रूपरेखा स्वदेश वापसी प्रक्रिया है. बांग्लादेशी सरकार जल्दी नवंबर में पहली बार 10 निर्वासित अवैध नागरिकों को स्वीकार कर लिया हैं.


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