रक्षा मामलों से जुड़ी संसद की स्‍थाई समिति के सदस्‍य रहे मनीष तिवारी ने यह बात शनिवार को एक बुक लॉन्‍च के मौके पर पूछे गए सवाल के जवाब में कही। 

इंडियन एक्‍सप्रेस’ ने 4 अप्रैल 2012 को सेना के दिल्‍ली कूच करने की रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस खबर ने उस वक्‍त पूरे देश को हिला कर रख दिया था। कई लोगों ने रिपोर्ट पर सवाल भी उठाए थे, लेकिन अब वरिष्‍ठ नेता मनीष तिवारी ने यह स्‍वीकार कर लिया है कि ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की वह रिपोर्ट सही थी। कांग्रेस प्रवक्‍ता ने कहा, ‘बिना सूचना दिए आर्मी की यूनिट के दिल्‍ली कूच करने की ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की खबर दुर्भाग्‍यपूर्ण थी….लेकिन सही थी।’

आपको बता दें कि उस समय यूपीए की सरकार थी और मनीष तिवारी उसमें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे थे। रक्षा मामलों से जुड़ी संसद की स्‍थाई समिति के सदस्‍य रहे मनीष तिवारी ने यह बात शनिवार को एक बुक लॉन्‍च के मौके पर पूछे गए सवाल के जवाब में कही। मनीष तिवारी के इस बयान से मौजूदा केंद्रीय मंत्री और उस वक्त आर्मी चीफ रहे वीके सिंह के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

उस वक्त सरकार और वीके सिंह के बीच विवाद चल रहा था। 2012 में ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ ने ये रिपोर्ट छापी थी ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने 4 अप्रैल 2012 को प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया था कि उस साल जनवरी महीने में आर्मी की दो टुकडि़यों ने दिल्‍ली की ओर कूच किया था। 16-17 जनवरी की रात हिसार (हरियाणा) में सेना की 33वीं आर्म्ड डिविजन की यूनिट ने दिल्ली की ओर कूच किया। यूनिट को नजफगढ़ के पास रोक कर वापस भेजा गया। वहीं, आगरा में 50वीं पैरा ब्रिगेड की एक टुकड़ी पालम तक पहुंची गई थी। उसे वहीं रोककर वापस भेजा गया।

तत्‍कालीन रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा ने देर रात डीजी (मिलिट्री ऑपरेशंस) लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी को बुलाया। पैरा ब्रिगेड डीजीएमओ के तहत काम करती है। उन्होंने रूटीन मूवमेंट की जानकारी दी थी। तत्‍कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था, ‘ सरकार के खिलाफ 16-17 जनवरी की रात सेना के दिल्ली कूच की खबर झूठी है।’ उन्होंने खबर को बेबुनियाद और बेवजह डर फैलाने वाला बताया था।

रक्षा मंत्री एके एंटनी (तत्कालीन) ने भी रिपोर्ट का खंडन किया था। आर्मी ने ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया था कि कोहरे में मूवमेंट का प्रैक्टिस की गई थी। हर मूवमेंट की जानकारी सरकार को नहीं दी जाती। पाकिस्तान को पता न चले, इस वजह से टुकडिय़ों का मूवमेंट दिल्ली की ओर किया गया… बॉर्डर की ओर नहीं। (जनसत्ता)

 


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