नवंबर माह में देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 3.2% की गिरावट आई है। यह इस क्षेत्र का चार साल का निम्नतम प्रदर्शन है और इससे गतिविधियों में सुधार की उम्मीद टूटी है।

नवंबर माह में देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 3.2% की गिरावट आई है। यह इस क्षेत्र का चार साल का निम्नतम प्रदर्शन है और इससे गतिविधियों में सुधार की उम्मीद टूटी है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के आज जारी आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन तथा पूंजीगत सामान के उत्पादन में भारी गिरावट से औद्योगिक उत्पादन घटा है। नवंबर, 2014 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 5.2% रही थी।

यह अक्टूबर, 2011 के बाद आईआईपी का सबसे खराब प्रदर्शन है। उस समय औद्योगिक उत्पादन 4.7% घटा था। अक्तूबर माह के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर के आंकड़े को संशोधित कर 9.9% किया गया है जबकि प्रारंभ में इसे 9.8% बताया गया था। आईआईपी में 75% का भारांश रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 4.4% घट गया। एक साल पहले समान महीने में विनिर्माण क्षेत्र में 4.7% वृद्धि हुई थी। नवंबर, 2015 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र के 22 उद्योग समूहों में से 17 में पिछले साल के समान महीने की तुलना में गिरावट दर्ज की गई। निवेश का संकेतक देने वाले पूंजीगत सामान खंड का उत्पादन नवंबर में 24.4% घट गया।

पिछले साल समान महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 7 प्रतिशत बढ़ा था। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 10% का हिस्सा रखने वाले बिजली क्षेत्र का प्रदर्शन भी समीक्षाधीन महीने में काफी खराब रहा। नवंबर, 2015 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 0.7% रही। इससे पिछले साल समान महीने में बिजली उत्पादन 10% बढ़ा था। नवंबर में खनन क्षेत्र का उत्पादन 2.3% बढ़ा। नवंबर, 2014 में यह 4% बढ़ा था। इसी तरह उपभोक्ता सामान क्षेत्र के उत्पादन में 1.3% की बढ़ोतरी दर्ज हुई जबकि एक साल पहले समान महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 1.6% घटा था। समीक्षाधीन महीने में टिकाउ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन 12.5% बढ़ा। वहीं नवंबर, 2014 में इस क्षेत्र का उत्पादन 14.5% घटा था। उपभोक्ता गैर टिकाउ सामान क्षेत्र के उत्पादन में नवंबर, 2015 में 4.7% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह 7% बढ़ा था।

उद्योग मंडल एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा, औद्योगिक उत्पादन की नकारात्मक वृद्धि से देश में मांग-आपूर्ति के मौजूदा असंतुलन की स्थिति और चिंताजनक हो गई है। पूंजीगत सामान तथा उपभोक्ता गैर टिकाउ सामान क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट से पता चलता है कि उद्योग क्षेत्र की स्थिति में सुधार आने वाले दिनों की प्रमुख चुनौती होगी। इस कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। दाम बढ़ने से दिसंबर माह की खुदरा महंगाई दर बढ़ोतरी के साथ 5.61 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। नवंबर महीने में यह दर 5.41 फीसदी थी।

साल 2014 के दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 4.28 फीसदी थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर माह में खाद्य वस्तुओं की खुदरा महंगाई दर 6.40 फीसदी रही, जबकि पिछले साल नवंबर में यह दर 6.07 फीसदी थी। आंकड़ों के मुताबिक गत दिसंबर माह में दाल व दाल उत्पाद की कीमतों में 45.92 फीसदी की बढ़ोतरी रही। पीएचडी चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष महेश गुप्ता ने कहा, आगे चलकर परिवारों की खर्च योग्य आय बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए। इसके लिए कराधान प्रणाली को सरल करने और लोगों को कर प्रोत्साहन बढ़ाने की जरूरत है।

चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से नवंबर की अवधि में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 3.9% रही है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2.5% रही थी। इस अवधि में खनन क्षेत्र का उत्पादन 2.1% बढ़ा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 2.5% बढ़ा था। इसी तरह कुल उपभोक्ता सामान उत्पादन 4.1% बढ़ा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-नवंबर की अवधि में 5.7% बढ़ा था। अप्रैल-नवंबर के दौरान टिकाउ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन 11.9% बढ़ा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 15.9% घटा था। साभार: जनसत्ता


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