भारत इस्राइल के साथ ताजे दौर के द्विपक्षीय सैन्य सौदों और परियोजनाओं को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रहा है। योजना यह है कि पीएम नरेंद्र मोदी के इसी साल होने वाले इस्राइल दौरे से पहले कुल तीन बिलियन डॉलर (करीब 20 हजार करोड़ रुपये) के इस सामूहिक सौदों को हरी झंडी दे दी जाए।

 

तेल अवीव के साथ कम-से-कम तीन सौदों को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी (सीसीएस) के पास भेज दिया गया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि इन सौदों से भारत को आर्म्स सप्लाइ करने वाले देशों में इस्राइल की स्थिति टॉप 3 की हो जाएगी। मुख्य समझौते के तहत इंडियन आर्मी के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मीडियम रेंज की मिसाइल प्रणाली मिलजुल कर विकसित करने की योजना है, जिसकी लागत 10 हजार करोड़ रुपये आएगी। इसे वित्तीय रूप से देखा-परखा जा रहा है, जिसके बाद इसे आखिरी रूप दे दिया जाएगा।

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इसके बाद सुखोई- 30 एमकेआईज और जैगवार्स जैसे एयर फोर्स के युद्धक विमानों के लिए 164 लेसर-डेजिग्नेशन पॉड्स के साथ-साथ भूमिगत आदेश केंद्रों से दुश्मनों को बाहर लाने की क्षमता वाले स्पाइस प्रिसिजन स्टैंड-ऑफ बमों की बारी आती है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, ‘ये दोनों एक महीने के अंदर सीसीएस द्वारा क्लियर हो जाने चाहिए।’

वहीं, 3,200 करोड़ रुपये की लागत वाली 321 स्पाइक ऐंटि टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) सिस्टम्स और 8,356 मिसाइलों पर रुकी बड़ी बातचीत पर भी नए सिरे से विचार हो रहा है। सूत्र ने बताया, ‘एटीजीएम प्रॉजेक्ट कॉस्ट पर इस्राइली कमर्शल बिड और रक्षा मंत्रालय की ओर से तय की गई बहुत कम कीमत के बीच (विचारों में) भारी अंतर है। कॉन्ट्रैक्ट पर समझौते के लिए अब तक 20 से ज्यादा बैठकें हो चुकी हैं। कोशिश अब इस गहरी खाई को पाटने की हो रही है।’

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आर्मी को थर्ड जेनरेशन के एटीजीएम्स की बहुत दरकार है, जो 2.5 किमी से ज्यादा की स्ट्राइक रेंज और फायर ऐंड फॉरगेट क्षमताओं से लैस हो। आर्मी को अपने सभी 382 बटैलियंस और 44 मेकनाइज्ड इन्फंट्री यूनिट्स को इन एटीजीएम्स से सुसज्जित करने हैं। अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने अमेरिकी जैवलिन मिसाइल सिस्टम पर इस्राइली स्पाइक एटीजीएम को वरीयता दी थी, लेकिन तब से ऐक्चुअल कॉन्ट्रैक्ट अधर में लटका पड़ा है।

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