शहला ने कहा कि भगवान मानने की प्रक्रिया में न सिर्फ सैनिकों को, बल्कि महिलाओं को भी उनके अधिकारों से वंचित किया गया है ।

जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष शहला राशिद शोरा ने कहा कि सियाचिन में बहादुर सैनिक लांस नायक हनुमंथप्पा की मौत के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान की सरकारों को जवाब देना चाहिए। शहला ने हनुमंथप्पा को ‘‘भगवान जैसा’’ मानने पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनकी जान दुश्मन की गोलियों ने नहीं ली, बल्कि उन्हें मौसम के हालात और सुविधाओं की कमी के कारण जान गंवानी पड़ी।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहला ने कहा कि ‘‘बलिदान के अलंकार’’ का इस्तेमाल कर सैनिकों को कई अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है । उन्होंने दावा किया कि थलसेना ‘‘खुद मानती है’’ कि कश्मीर में उसके जितने सैनिक लड़ाई में जान नहीं गंवाते, उससे ज्यादा सैनिक खुदकुशी कर जान गंवाते हैं । वामपंथी छात्र संगठन आॅल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (आइसा) की सदस्य शहला ने कहा कि भगवान मानने की प्रक्रिया में न सिर्फ सैनिकों को, बल्कि महिलाओं को भी उनके अधिकारों से वंचित किया गया है ।

उन्होंने कहा, ‘‘वे जब भी किसी को भगवान मानना शुरू करते हैं तो असल में वे उसे दबा रहे होते हैं और हम यह भारत माता के साथ देख सकते हैं ।’’  शहला ने कहा, ‘‘हमें बताया जाता है कि सैनिकों ने सीमा पर बलिदान दिया है । हनुमंथप्पा की मौत सीमा पर हुई । वे हमें यकीन दिलाना चाहेंगे कि उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया । लेकिन हम हनुमंथप्पा की मौत पर जश्न क्यों मना रहे हैं ?’’

उन्होंने कहा, ‘‘क्या उनकी मौत दुश्मन की गोली से हुई ? क्या किसी पाकिस्तानी फिदायीन हमले में उन्होंने दम तोड़ा ? नहीं, वह जहां तैनात थे, वहां के मौसम के हालात के कारण उनकी मौत हुई  और उन्हें उचित सुविधाएं नहीं दी गई ।’’ शहला ने कहा, ‘‘भारत और पाकिस्तान की सरकारों को लोगों को जवाब देना पड़ेगा ।’’ (jansatta.com)


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