नई दिल्ली : भारत फारस की खाड़ी में जंगी जहाजों का बेड़ा भेजने जा रहा है। फारस की खाड़ी का यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है। भारत का प्रयास है कि इस क्षेत्र में अपना जंगी बेड़ा भेजकर सुन्नी बाहुल्य अरब देशों जिसमें सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के साथ शिया बाहुल्य देश ईरान के साथ रिश्तों में संतुलन स्थापित हो। भारत के 5 वॉरशिप्स अगले महीने रवाना किए जाएंगे। ये डिफेंस रिलेशनशिप को मजबूत करने से जुड़े ऑपरेशंस में हिस्सा लेंगे।

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इस मामले में रक्षा मंत्रालय द्वारा कहा गया कि विभिन्न मिसाईलों को नष्ट करने वाला आईएनएस दिल्ली, युद्धपोत आईएनएस तरकश और आईएनएस त्रिखंड, मिसाईल पोत आईएनजी गंगा और टैंकर आईएनएस दीपक को मुंबई स्थित वेस्टर्न नेवल फ्लीट से 3 मई को दुबई भेजा जाऐगा। इसके बाद यह बेड़ा 12 मई को कुवैत जाएगा। यहां से यह मस्कट पहुंचेगा। इसके बाद 28 मई तक यह मुंबई लौट जाएगा। इस मामले में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर मई माह में ओमान जाऐंगे। इसी दौरान, IAF सुखोई-30MKI फाइटर जेट और IL-78 मिड-एयर रीफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट अलास्का (यूएस) एयरबेस में रेड फ्लैग एक्सरसाइज से लौटते वक्त यूएई में रहेगा। अलास्का में ये एक्सरसाइज 28 अप्रैल से 13 मई तक होगी।

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दरअसल देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के  दौरे के बाद इस बात की जरूरत का अनुभव किया गया कि शिया और सुन्नी में समन्वय हो। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने के लिए ईरान एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर प्रोजेक्ट के जरिए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने के लिए ईरान अहम रास्ता है। ईरान के चाबहार बंदरगाह से भारत को चीन का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को विकसित कर रहा है।

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