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मुख्य न्यायधीश टीएस ठाकुर ने एक बार फिर से केंद्र सरकार को चेताते हुए गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया ‘‘हाईजैक’’ नहीं की जा सकती. उन्होंने आगे कहा, न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए क्योंकि ‘‘निरंकुश शासन’’ के दौरान उसकी अपनी एक भूमिका होती है.

7वें भीमसेन सच्चर स्मृति व्याख्यान के दौरान मुख्य न्यायधीश ने कहा, शक्तिशाली संसद न्यायिक नियुक्तियों में शामिल होने की कोशिश करती है. एनजेएसी उसी के लिए एक कोशिश थी. एनजेएसी मामले में संविधान पीठ ने पाया कि जजों की नियुक्ति में कानून मंत्री और दो अन्य का होना न्यायपालिका की आजादी में खलल है. सरकार का विचार अलग है लेकिन जजों की नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, अदालत के अंदर न्यायधीशों को मामले सौंपने का फैसला न्यायपालिका के पास होना चाहिए. उन्होने  कहा कि कौन से मामले को कौन से जज सुनेंगे यह न्यायपालिका तय करेगी. कौन से मामले सुने जाएंगे और कौन से नहीं यह भी न्यायपालिका को ही तय करना है, कोई बाहरी इसे तय नहीं कर सकता.

उन्होने कहा कि न्यायपालिका के सामने चुनौतियां बहुत ज्यादा हैं. न्यायपालिका उन चुनौतियों का हल निकाले ताकि लोगों में उसके प्रति विश्वास और ज्याद मजबूत हो. स्वतंत्र न्यायपालिका के बिना लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता, लोकतंत्र में स्वतंत्र न्यायपालिका का होना बहुत जरुरी है. स्वतंत्र न्यायपालिका से ही लोकतंत्र सफल होगा.


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