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संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर पलटवार करते हु कहा कि जो लोग दूसरों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने कश्मीर को लेकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा और पाकिस्तान उसे छीनने का ख्वाब देखना छोड़ देना चाहिए.

विदेश मंत्री ने कहा, ”अगर पाकिस्तान ये समझता है कि वह इस तरह की हरकत करके या भड़काऊ बयान देकर भारत का कोई हिस्सा हमसे छीन सकता है तो मैं पूरी दृढ़ता और स्पष्टता से कहना चाहती हूं कि आपका ये मंसूबा कभी पूरा नहीं होगा.”

सुषमा स्वराज ने कहा, ”पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साथ मानवाधिकार का हनन हो रहा है. अगर किसी को मानवाधिकार हनन देखना है तो बलूचिस्तान को देखे. ऐसी बाते कहने से पहले पाकिस्तान एक बार बगल में झांककर देखे क्या हो रहा है. वे खुद बलूचिस्तान में क्या कह रहे हैं. बलूचिस्तान में जो हो रहा है वह यातनाओं की पराकाष्ठा है.”

नवाज शरीफ के बयान पर सुषमा ने कहा, ”जिनके घर खुद शीशे के होते हैं वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते. हमने शर्तों के साथ नहीं मित्रता के साथ पाकिस्तान की तरफ हाथ बढ़ाया है. कभी ईद की शुभकामनाएं, कभी क्रिकेट की शुभकामनाएं, कभी स्वास्थ्य का हाल चाल पूछा. हमने दो साल में मित्रता का जो पैमाना तय किया जो पहले कभी नहीं था. लेकिन हमें इसके बदले क्या मिला. पठानकोट, उरी बहादुर अली. हम शर्तें लगा रहे हैं या आप दूसरी नीयत दिखा रहे हैं?”

आतंकवाद के मुद्दे पर बोलते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, ”उरी में हम पर आतंकी ताकतों ने हमला किया. हम आतंक से पैदा होने वाले दर्द को समझते हैं. आज सबको यह स्वीकार करना होगा कि आतंकवाद मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है. ये निर्दोषों को निशाना बनाता है.”


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