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केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने 2002 में हुए गुजरात दंगों के मामलें में पीएमओ और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है. ये नोटिस तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के बीच हुए पत्र व्यवहार को सार्वजनिक न किए जाने के मुद्दे पर किया गया हैं.

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए मुख्य सूचना आयुक्त राधाकृष्ण माथुर ने पीएमओ और गुजरात सरकार को (उसके मुख्य सचिव के माध्यम से) नोटिस जारी कर उन्हें निर्देश दिया कि नवंबर के पहले सप्ताह में सुनवाई के दौरान अपनी दलीलें रखें.

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यह नोटिस एक याचिका के आधार पर जारी किया गया है, जिसे एक आरटीआई कार्यकर्ता ने दायर किया है.  इस मामले में पीएमओ से दोनों के बीच हुए पत्र व्यवहार को सार्वजनिक करने को कहा गया था. इसके जवाब में पीएमओ ने कहा कि इस पत्र व्यवहार को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, अगर ऐसा किया गया तो इसका असर गुजरात दंगों के संबंध में चल रहे मुकदमों पर पड़ सकता है.

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आवेदक ने 27 फरवरी, 2002 से 30 अप्रैल, 2002 के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और गुजरात सरकार के बीच राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पर लिखे गए समस्त पत्रों की प्रतियां मांगी थीं. बाद में निर्देशों पर प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रथम अपीलीय प्राधिकार, सीपीआईओ ने जवाब दिया था कि वे तीसरे पक्ष के विचार जानने की प्रक्रिया में हैं। इस मामले में तीसरा पक्ष गुजरात सरकार और नरेंद्र मोदी हैं.

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